Guru Gochar 2024: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है। गुरु की गिनती शुभ ग्रहों में होती है और जातक की कुंडली में शुभ स्थान पर होने खुशियां और सुख-समृद्धि मिलती है। वैदिक ज्योतिष में गुरु लगभग एक वर्ष के अंतराल पर एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। ऐसे में गुरु को एक राशि में दोबारा से आने में करीब एक साल से ज्यादा का समय लगता है। 01 मई 2024 को गुरु का राशि परिवर्तन हुआ है। गुरु मेष राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए अपने शत्रु की राशि वृषभ में प्रवेश कर लिया है। आपको बता दें कि वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र हैं और गुरु-शुक्र की बीच शत्रुता का संबंध है। गुरु का अपने शत्रु की राशि में प्रवेश करना कुछ राशि वालों के लिए बहुत ही कष्टकारी साबित हो सकता है। देवगुरु बीते 01 मई को वृषभ राशि में प्रवेश कर चुके हैं। फिर 03 मई को गुरु वृषभ राशि में अस्त हो गए हैं। वहीं नवांश कुंडली में गुरु 18 दिन लिए नीच के होकर अतिचारी हो गए हैं। गुरु के अतिचारी होने से कुछ राशि वालों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। आइए जानते हैं किन राशियों पर गुरु का राशि परिवर्तन और अतिचारी भारी पड़ सकता है।