वैदिक ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रह समय-समय पर अपनी राशि बदलते रहते हैं। ग्रहों के राजकुमार बुध लगभग 25 दिनों के अंतराल पर एक से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। बुध ग्रह का राशि परिवर्तन होने से हर एक राशि के जातकों पर इसका प्रभाव अवश्य ही पड़ता है। बुध को वाणी, व्यापार और बुद्धि के कारक माना जाता है। बुध 26 मार्च को सुबह 02 बजकर 39 मिनट पर मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष राशि में पहले से ही देवताओं के गुरु बृहस्पति मौजूद हैं। इस तरह से मेष राशि में दोनों ही ग्रहों की युति होगी। 12 साल बाद मेष राशि में बुध और गुरु की युति हो रही है। गुरु एक राशि में करीब 01 वर्ष तक रहते हैं इस प्रकार एक राशि में दोबारा आने में करीब 12 वर्ष का समय लगता है। मेष राशि में गुरु-बुध की युति से कई राशियों को लाभ मिलने के संकेत हैं।