Saturn Conjunction In Kumbh: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनसुार ग्रहों का गोचर हर एक जातक के ऊपर उसकी कुंडली में पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर शुभ फल या अशुभ फल प्राप्त होते हैं। ग्रह राशि परिवर्तन करने साथ-साथ अन्य दूसरे ग्रहों के साथ किसी एक राशि में युति भी बना लेते हैं। ग्रहों की युति का प्रभाव भी जातकों के जीवन पर देखने को मिलता है। आपको बता दें कि साल 2024 के अंत में कर्मफलदाता शनिदेव और सुख-वैभव दाता शुक्रदेव दोनों की युति बनने जा रही है। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह माने गए हैं। यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, जिसका असर सभी 12 राशियों के ऊपर काफी लंबे समय तक रहता है।
इसके अलावा शुक्र अपनी राशि बदलने वाले हैं। शुक्रदेव को दैत्यों का गुरु माना गया है लेकिन इसके साथ ही शुक्र भोग-विलास, सौंदर्य, आकर्षण, धन-दौलत और सुख-समृद्धि के दाता ग्रह हैं। शुक्र के राशि परिवर्तन करने से जातकों के जीवन में सुख-सुविधाओं और भोग विलास पर प्रभाव पड़ता है। इस तरह से किसी एक ही राशि में शुक्र-शनि की युति होने से कई राशि के जातकों के जीवन में प्रभाव देखने को मिल सकता है। आपको बता दें कि साल के अंत में शुक्र और शनि की युति कुंभ राशि में होगी। 28 दिसंबर को शुक्रदेव मकर राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। जहां पर पहले से शनिदेव विराजमान हैं। शुक्र कुंभ राशि में 28 जनवरी 2025 तक रहेंगे। इस तरह से साल के शुरू होने पर कुछ राशि वालों को शनि-शुक्र की युति का विशेष लाभ मिल सकता है।