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पंचक काल: शुरू हो चुके हैं पंचक, न करें कोई भी शुभ कार्य अन्यथा होगी धन की हानि

Sat, 16 Oct 2021 12:10 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नयी दिल्ली
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panchak
ज्योतिष शास्त्र में मुहूर्त (काल, समय) का विशेष महत्व माना गया है। ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार कुछ नक्षत्रों या ग्रह संयोग में शुभ कार्य करना बहुत ही अच्छा माना जाता है। वहीं कुछ नक्षत्रों में कोई विशेष कार्य करने की मनाही रहती है। 15 अक्टूबर से पंचक लगने के कारण इसे  चोर पंचक  का नाम दिया गया है। 
15 अक्टूबर को ही दशहरा के बाद शुक्रवार को शुरू होने वालें पचंक को चोर पंचक कहते है। इस दिन यात्रा करने की मनाही होती है। साथ ही इस दिनों में व्यापार लेन देन की भी मनाही होती है। अगर इस दिन मनाही वाले काम करते है तो आपको धन की हानि होती है।
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पंचक के दौरान शुभ कार्य करने से होगा नुकसान - फोटो : istock
पंचक के दौरान  शुभ कार्य करने से होगा नुकसान 
पंचक के दौरान आपको कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। पंचक जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि पांच दिन तक चलता है, इसलिए किसी भी नए कार्य कि शुरुआत इन पांच दिन में न करें। आइये जानते हैं कि पंचक काल में आपको क्या नहीं करना चाहिए । 
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न करें कोई बिज़नेस  - फोटो : pixabay
न करें कोई बिज़नेस 
पंचक के दौरान बिजनेस को लेकर किसी भी तरह का लेनदेन नहीं करना चाहिए।

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यात्रा से बचें - फोटो : pixabay
यात्रा से बचें 
पंचक के दिनों में किसी भी तरह की यात्रा की शुरुआत न करे। आपको कोई भी यात्राकरनी हो तो 20 अक्टूबर के बाद जायें।
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लेनदेन से बचें - फोटो : pixabay
लेनदेन न करें 
पंचक के दौरान लेन-देन, व्यापारिक सौदे, घर में लकड़ी आदि का कार्य या घर बनाने के लिये लकड़ी इकट्ठी करना जैसे कार्यों से बचना चाहिए।
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नई दुल्हन को विदा न करें - फोटो : सोशल मीडिया
नई दुल्हन को न कराएं विदा 
अगर किसी की शादी हुई है तो नई दुल्हन को घर नहीं लाना चाहिए और न ही विदा करना चाहिए।
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अंतिम क्रिया में ये सावधानी बरतें  - फोटो : amar ujala
अंतिम क्रिया में ये सावधानी बरतें 
अगर किसी की मृत्यु हो गई है तो उसके अंतिम संस्कार ठीक ढंग से न किया गया तो पंचक दोष लग सकते है। इसके बारें में विस्तार से गरुड़ पुराण में बताया गया है जिसके अनुसार अगर अंतिम संस्कार करना है तो किसी विद्वान पंडित से सलाह लेनी चाहिए और साथ में जब अंतिम संस्कार कर रहे हो तो शव के साथ आटे या कुश के बनाए हुए पांच पुतले बना कर अर्थी के साथ रखें। और इसके बाद शव की तरह ही इन पुतलों का भी अंतिम संस्कार विधि-विधान से करें।
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