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Panch Grahi Yog 2022 : पंचग्रही योग का देश-दुनिया पर प्रभाव, क्या होगा रूस-यूक्रेन युद्ध और कोरोना का भविष्य ?

Sun, 27 Feb 2022 11:52 AM IST
विनोद शुक्ला पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य, कानपुर

सार

मकर राशि के स्वामी शनि स्वयं अपनी ही राशि में बैठे हुए हैं अतः शनि और मंगल दोनों ही बलवान स्थिति में है। इनकी युति को ज्योतिष जगत में अच्छा नहीं माना गया है। इस बार तो शुक्र, बुध और चंद्रमा भी साथ आयेंगे तो जब कई ग्रह एक साथ एक ही राशि में होते हैं तो उनमें आपस में ग्रह युद्ध हो जाता है।
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Panch Grahi Yog 2022 : मंगल शनि की राशि मकर में उच्च के होते हैं और रूचक राज योग का निर्माण करते हैं, - फोटो : Social media
ज्योतिषशास्त्र में बनने वाले पंचग्रही योग के बारे में जो कि 27 फरवरी 2022 को मकर राशि में बन रहा है। यह युति 27,28 फरवरी और 01 मार्च तक बनी रहेगी, इसके बाद चंद्रमा इस युति से बाहर निकल जाएंगे। 27 फरवरी को 2:28 मिनट दोपहर में मकर राशि में पांच ग्रह एकत्रित होंगे। शनि, मंगल,चंद्रमा, शुक्र और बुध एक ही राशि में होगे। तीन ग्रह सूर्य के उत्तराषाढा नक्षत्र में होंगे और सूर्य स्वयं ही शनि की मूल त्रिकोण राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं। पहले से ही इस राशि में प्लूटो का गोचर चल रहा है। अतः इन सभी ग्रहों के साथ प्लूटो की युति के दूरगामी परिणाम आने वाले समय में दिखेंगे। हर दो से तीन सालों में यह योग बन जाता है। 26 दिसंबर 2019 में धनु राशि में राहु केतु अक्ष पर सारे ग्रहों की युति हुई और कोरोना महामारी ने पूरे विश्व में अपने पाँव पसारे। इसके बाद इस तरह के योग कई बार बने। जिससे कि आज भी विश्व में भय व्याप्त है। 
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9 फरवरी 2021 में मकर राशि में पांच ग्रह एकत्रित हुए थे लेकिन मंगल इस योग में नहीं था। मंगल एक ऊर्जावान ग्रह है और मकर राशि पृथ्वी तत्व राशि है। मकर राशि में शनि मंगल की युति को सिद्धांतों में लिखा गया है कि धन धान्य की कमी, आर्थिक परेशानी और युद्ध की संभावनाएं बन जाती हैं। मंगल शनि की राशि मकर में उच्च के होते हैं और रूचक राज योग का निर्माण करते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है क्योंकि मकर राशि के स्वामी शनि स्वयं अपनी ही राशि में बैठे हुए हैं अतः शनि और मंगल दोनों ही बलवान स्थिति में है। इनकी युति को ज्योतिष जगत में अच्छा नहीं माना गया है। इस बार तो शुक्र, बुध और चंद्रमा भी साथ आयेंगे तो जब कई ग्रह एक साथ एक ही राशि में होते हैं तो उनमें आपस में ग्रह युद्ध हो जाता है। हालांकि पूरे विश्व के परिपेक्ष्य में भारत पर इसका प्रभाव कम ही होगा। यह सभी घटनाएं पूरे विश्व के किसी भी हिस्से में हो सकती हैं।
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shani dev
शनि आम जनता के कारक है तो आम जनमानस पर इसका प्रभाव पड़ेगा सरकार कुछ बड़े निर्णय ले सकती है जिसका जनता द्वारा विरोध भी किया जा सकता है। मंगल साथ है तो युद्ध की स्थिति बनेगी,बड़ी आतंकवादी घटनाएं हो सकती है,किसी बड़े भूकंप से जनधन की हानि की संभावना है। सांप्रदायिक माहौल कई हिस्से में खराब होंगे। शनि पश्चिम दिशा को दर्शाते हैं और यूरोप पश्चिम में ही है। पूर्व यूरोप,रशिया,यूक्रेन,पोलैंड आदि कई देश शामिल हो सकते है। शनि जब 18 फरवरी 2022 को धनिष्ठा नक्षत्र में आए रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ। रूस ने यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई कर दी। छोटी छोटी सैन्य कार्रवाई चलती रहेगी। रूस और यूक्रेन का वार दिख रहा है लेकिन अवधि कम ही होगी। 8 मार्च के बाद हो सकता है कुछ स्थिरता आए। वैसे भी जो योग बनते है ब्रह्मांड में उसका प्रभाव आगे आने वाले कई महीनों तक पड़ता है। जिससे कि विश्व के कुछ हिस्सों में अशांति का माहौल बनता हुआ दिख रहा है।

मकर राशि में ग्रहों की इस युति से पानी से जुड़ी हुई परेशानियां दिख रही है जैसे पानी के नीचे युद्ध,साइक्लोन,पानी के नीचे भूकंप,सुनामी। इस युति में बुध भी साथ है तो व्यापार में भी उतार चढ़ाव दिखेगा। अचानक से मौसम का बदलना। शुक्र भी इस युति में है तो फाइनेंस के क्षेत्र में,फिल्म इंडस्ट्री में कुछ प्रभाव दिख सकता है। सोना और चांदी ,शेयर बाजार में काफी बड़े बड़े उतार चढ़ा देखने को मिलेंगे।
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
इस वर्ष कोरोना या कोई नया वायरस या कोई नई बीमारी आ सकती है जिसका लोगों पर मानसिक असर ज्यादा पड़ेगा। लोग भय में रहेंगे। क्योंकि शनि मकर राशि से कुंभ राशि में 28 अप्रैल 2022 को जाएंगे व फिर वक्री अवस्था में मकर में आ जाएंगे। फिर ये 2023 जनवरी को मकर राशि को पूरी तरह छोड़ देंगे.... यहां से कोरोना एक फ्लु में बदल जाएगा व फिर ये एक साधारण बीमारी बन के रह जाएगी। 

इन ग्रहों के गोचर का सकारात्मक प्रभाव ये है कि मंगल बलवान स्थिति में है और शनि भी,अतः यह समय अपनी मेहनत से कुछ कर दिखाने का है समय है। मकर राशि काल पुरुष कुंडली की दशम भाव की राशि है इसलिए अपने कार्य क्षेत्र पर ध्यान अवश्य दें। क्योंकि मंगल को दशम भाव में दिग्बल प्राप्त है। शनि कर्म के देवता हैं और मंगल पराक्रम के अतः अपने पराक्रम के बल पर अपने कर्म को सही दिशा दे तो यह युति अपना अच्छा फल ही देगी।
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