ज्योतिष शास्त्र में सभी नौ ग्रहों और 12 राशियों की विशेष भूमिका होती है। नौ ग्रहों और 12 राशियों की गणना के आधार पर किसी जातक के भविष्य के बारे में अध्ययन किया जाता है। जब भी कोई शिशु इस संसार में जन्म लेता है तो उसी समय उसकी एक राशि तय हो जाती है। ग्रहों और राशि की गणना के आधार पर ही व्यक्ति की कुंडली उसके बारे में बहुत कुछ जानकारी देती है। कुंडली के अध्ययन के आधार पर व्यक्ति के ऊपर पड़ने वाले अच्छे और बुरे ग्रहों का विश्लेषण किया जाता है। जैसे अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल भारी होता है या अशुभ भाव में आकर विराजमान होता है तब उस पर मंगल दोष का प्रभाव होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बाहरवें भाव में मंगल आकर बैठे हों तो वह व्यक्ति मांगलिक कहलाता है। जातक की कुंडली में मंगल दोष होने पर उसके विवाह में अड़चनें आती है। जातक को ज्यादा गुस्सा आता है। व्यक्ति का दांपत्य जीवन में परेशानियों के साथ बीतता है।