ज्योतिष विज्ञान में ग्रह गोचर शब्द अक्सर सुनने को मिलता है। यहां गोचर का सीधा मतलब ग्रह की चाल से है। ग्रह का राशि परिवर्तन (एक राशि से दूसरी राशि में जाना) गोचर कहलाता है। ज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु नौ ग्रह हैं। ये गोचर अपनी गति के अनुसार समय-समय पर राशियां बदलते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के गोचर का बहुत प्रभाव पड़ता है। सूर्य से लेकर केतु तक सभी ग्रहों के राशि परिवर्तन का अवधि अलग-अलग होती है।
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सौरमंडल के ग्रह
- फोटो : Pixabay
ग्रहों के गोचर की अवधि
ग्रह
गोचर की अवधि
सूर्य
एक माह
चंद्र
लगभग सवा दिन
मंगल
करीब डेढ़ माह
बुध
लगभग 14 दिन
बृहस्पति
एक साल
शुक्र
लगभग 23 दिन
शनि
ढ़ाई साल
राहु-केतु
एक से डेढ़ वर्ष
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सौरमंडल के ग्रह
- फोटो : Pixabay
सूर्य का गोचर
राशि स्वामी- सिंह राशि
कारक- आत्मा का कारक
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
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चंद्रमा
- फोटो : Pixabay
चंद्रमा का गोचर
राशि स्वामी- कर्क राशि
कारक- मन का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से पहले, तीसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- चौथे, आठवें और बारहवें भाव में अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।
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मंगल देव
- फोटो : अमर उजाला
मंगल का गोचर
राशि स्वामी- मेष और वृश्चिक
कारक- ऊर्जा, साहस और बल
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
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बुध ग्रह
- फोटो : social media
बुध का गोचर
राशि स्वामी- मिथुन और कन्या राशि का स्वामी
कारक- बुद्धि, तर्कशास्त्र, संवाद का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से दूसरे, चौथे, छठे, आठवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- शेष भावों में परिणाम अच्छे नहीं
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बृहस्पति ग्रह
- फोटो : Pixabay
गुरु का गोचर
राशि स्वामी- धनु और मीन राशि का स्वामी
कारक- ज्ञान, संतान एवं परिवार का कारक
गोचर का शुभ फल- दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
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शुक्र ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
शुक्र का गोचर
राशि स्वामी- वृषभ और तुला राशि का स्वामी
कारक- प्रेम, रोमांस, सुंदरता और कला
गोचर का शुभ फल- पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, आठवें, नौवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
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शनि ग्रह
- फोटो : Pixabay
शनि का गोचर
राशि स्वामी- मकर और कुंभ राशि का स्वामी
कारक- कर्म का कारक
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
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राहु देव
- फोटो : अमर उजाला
राहु का गोचर
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- चतुरता, तकनीकी और राजनीति
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है।
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल।
केतु का गोचर
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- वैराग्य, आध्यात्म और मोक्ष
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल - बाकी भाव में अशुभ फल।