क्या है कालसर्प योग?
जब कुंडली में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह आ जाते हैं तब कुंडली में कालसर्प योग बनता है। कालसर्प योग दो शब्दों को मिलाकर बना है। इसमें पहला शब्द है काल, यानि मृत्यु और दूसरा शब्द है - सर्प, जिसका तात्पर्य सांप से है। कुंडली में कालसर्प योग के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक कष्ट सहना पड़ता है। इसके साथ ही जातकों को कई अन्य परेशानियां होती हैं।
ऐसे मिलते हैं कालसर्प योग के संकेत
मानसिक एवं शारीरिक कष्ट का होना, पैतृक संपत्ति का नष्ट होना, भाई-बंधुओं से धोखा, संतान से कष्ट, शत्रुओं से निरंतर भय, बुरे स्वप्न एवं अनिद्रा रोग, कोर्ट कचहरी का सामना उपरोक्त सभी परिस्थितियां कालसर्प योग के प्रभावों का संकेत करती हैं।
कालसर्प योग से मुक्ति के उपाय
कालसर्प योग दूर करने के लिए जातकों को शिव मंदिर में सोना, चांदी, तांबा, पीतल धातु से निर्मित नाग-नागिनों के जोड़े को चढ़ाने चाहिए। मंदिर में भगवान शंकर जी का विशेष अभिषेक करना चाहिए। रूद्राभिषेक कर नौ प्रकार के नागों की प्रतिमा बना उनको नदी में प्रवाहित करना चाहिए। नागों को प्रवाहित करने के बाद स्नान करें। पहने हुए वस्त्रों का त्याग करें। नवीन वस्त्र धारण करें। नाग स्तोत्र का पाठ करें।