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गुरु ग्रह की उल्टी चाल: 20 जून से कुंभ राशि में वक्री होंगे गुरु, जानिए वक्री गुरु का प्रभाव और खास बातें

Thu, 17 Jun 2021 12:21 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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jupiter retrograde in aquarius - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषशास्त्र में सभी नौ ग्रहों की भूमिका विशेष होती है। सभी ग्रह एक निश्चित अंतराल में अपनी स्थिति को बदलते रहते हैं, ग्रह एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में भ्रमण करने को गोचर कहा जाता है। ग्रहों के राशि परिवर्तन करने से सभी 12 राशियों पर इसका शुभ और अशुभ दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है। ग्रहों के राशि परिवर्तन के अलावा ग्रह वक्री और मार्गी भी होते रहते हैं। वक्री का मतलब उल्टी चाल और मार्गी का अर्थ सीधी चाल चलना होता है। ग्रहों का वक्री होना एक ज्योतिषीय घटना है ऐसे में जब भी कोई ग्रह उल्टी दिशा में चलने लगता है तो इसका जातकों पर अच्छा और बुरा दोनों तरह का प्रभाव देखने को मिलता है। 20 जून को वृहस्पति ग्रह कुंभ राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलना आरंभ कर देंगे।

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guru ka rashi parivartan - फोटो : अमर उजाला
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति
सभी ग्रहों का ज्योतिष में अपना-अपना स्थान और महत्व होता है। ज्योतिष में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है। इसलिए इन्हें गुरु ग्रह भी कहा जाता है। गुरु ग्रह को धनु और मीन राशि पर आधिपत्य है। गुरु कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के माने जाते है। इसके अलावा ये पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी माने जाते हैं। अगर गुरु ग्रह के कारक की बात करें तो ये धर्म, आध्यात्म, ज्ञान, शिक्षा आदि माने गए हैं। गुरु ग्रह दूसरे ऐसे ग्रह हैं जो किसी एक राशि में लंबे समय तक रहते हैं। यह करीब 13 महीनों तक किसी एक राशि में गोचर करते हैं। इन 13 महीनों के दौरान लगभग चार माह वक्री अवस्था में गुजारते हैं। देवगुरु बृहस्पति को कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम एवं एकादश भाव का कारक माना जाता है। बृहस्पति से प्रभावित व्यक्ति धार्मिक,आस्थावान, दर्शनिक, विज्ञान में रूची रखने वाले एवं सत्यनिष्ठ होते हैं। गुरु सभी ग्रहों में सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ मित्रवत व्यवहार करते हैं जबकि शुक्र और बुध के साथ इनका शत्रुता का भाव रहता है।
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गुरु का 2021 में राशि परिवर्तन
बृहस्पति में आस्था
हिंदू धर्म में बृहस्पति को भगवान विष्णु के बराबर मानकर पूजा आराधना की जाती है। देवताओं में इन्हें गुरु का पद प्राप्त है इस कारण से सभी देवी-देवताओं के लिए यह पूजनीय हैं। मान्यताओं के अनुसार भगवान बृहस्पति महर्षि अंगिरा की संतान हैं। वार में गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति को समर्पित है इस दिन उपवास और केले के पौधे की पूजा आराधना की जाती है। इस दिन पीला वस्त्र पहनना और पीली चीजों का भोग लगाना शुभ माना गया है।

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बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
इस दिन से हो रहे हैं बृहस्पति वक्री
बृहस्पति 13 माह में अपनी राशि बदलते हैं और इस दौरान चार महीनों तक वक्री अवस्था में गोचर करते हैं। इस साल 20 जून से बृहस्पति कुंभ राशि में उल्टी चाल से चलने लगेंगे। इसके बाद 14 सितंबर 2021 को दोबारा मार्गी होंगे।
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गुरू ग्रह
गुरु की वक्री चाल का प्रभाव
ज्योतिष में मार्गी का मतलब सीधी चाल और वक्री का मतलब उल्टी चाल चलना होता है। आमतौर यह माना जाता है कि जब कोई ग्रह वक्री चाल से चलता है तो वह जातकों पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगता है लेकिन ऐसा नहीं है। अगर कुंडली में गुरु शुभ भाव में तो वक्री चाल से अच्छे फल की प्राप्ति होती है। वहीं अगर कुंडली में गुरु अशुभ स्थिति में है तो वक्री होने पर कार्यों में रुकावटें आने लगती हैं।
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गुरु ग्रह
कुंडली में मजबूत बृहस्पति
अगर किसी जातक की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत और शुभ भाव में होते हैं तो व्यक्ति को अच्छे परिणाम मिलते हैं और उसकी रुचि धर्म-कर्म की तरफ बढ़ने लगता है। मान-सम्मान और धन लाभ होने लगता है।
 
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गुरू ग्रह
कुंडली में कमजोर बृहस्पति
अगर किसी जातक की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर या अपने शत्रु भाव में विराजमान हैं तो जातकों को परेशानियां उठानी पड़ती है। इन्हें विवाह में समस्याएं आने लगती हैं। दरिद्रता और बीमारियां चारो तरफ से घेर लेती हैं।
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बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
ज्योतिष में गुरु के उपाय
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार गुरुवार के दिन पूजन करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होते हैं। अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर है या काम में बाधा आ रही है तो गुरुवार के दिन कुछ आसान से उपाय करने से कुंडली में बृहस्पति मजबूत होता है, देवगुरु बृहस्पति की कृपा से हमारी समस्याओं का समाधान होता है। सौभाग्य बढ़ता है और किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती है। बृहस्पति देव को पीला रंग अतिप्रिय है। वे पीले रंग का पीतांबर धारण करते हैं। इसलिए इनकी पूजा में हल्दी का उपयोग किया जाता है। गुरुवार के दिन केसर पीला चंदन या फिर हल्दी का दान करना बहुत शुभ होता है। इससे घर में सुख-शांति आती है और आरोग्यता मिलती है।
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