guru ka rashi parivartan
- फोटो : अमर उजाला
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति
सभी ग्रहों का ज्योतिष में अपना-अपना स्थान और महत्व होता है। ज्योतिष में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है। इसलिए इन्हें गुरु ग्रह भी कहा जाता है। गुरु ग्रह को धनु और मीन राशि पर आधिपत्य है। गुरु कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के माने जाते है। इसके अलावा ये पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी माने जाते हैं। अगर गुरु ग्रह के कारक की बात करें तो ये धर्म, आध्यात्म, ज्ञान, शिक्षा आदि माने गए हैं। गुरु ग्रह दूसरे ऐसे ग्रह हैं जो किसी एक राशि में लंबे समय तक रहते हैं। यह करीब 13 महीनों तक किसी एक राशि में गोचर करते हैं। इन 13 महीनों के दौरान लगभग चार माह वक्री अवस्था में गुजारते हैं। देवगुरु बृहस्पति को कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम एवं एकादश भाव का कारक माना जाता है। बृहस्पति से प्रभावित व्यक्ति धार्मिक,आस्थावान, दर्शनिक, विज्ञान में रूची रखने वाले एवं सत्यनिष्ठ होते हैं। गुरु सभी ग्रहों में सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ मित्रवत व्यवहार करते हैं जबकि शुक्र और बुध के साथ इनका शत्रुता का भाव रहता है।