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कुंडली में ऐसे बनते हैं विदेश यात्रा के योग, जानें कब मिलेगा आपको परदेश जाने का मौका

Wed, 25 Dec 2019 04:59 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : kundali
कुंडली में चौथा और बाहरवें घर या उनके स्वामियों का संबंध यानी उस घर में स्थित राशि के स्वामी से विदेश में स्थायी रूप से रहने का सबसे बड़ा योग बनता है। इस योग के साथ चतुर्थ भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव आवश्यक है। यानी उस घर में कोई भी पाप ग्रह स्थित हो या उसकी दृष्टि हो। इसके साथ ही कुंडली में अच्छी दशा होना भी अनिवार्य है। बहरहाल जानते हैं कुंडली में विदेश यात्रा का योग किन परिस्थितियों में बनता है..
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
  • सप्तम और बाहरवें भाव या उनके स्वामियों का परस्पर सम्बन्ध जातक को विवाह के बाद विदेश लेकर जाता है। अगर ये योग कुंडली में हो तो व्यक्ति किसी विदेशी मूल के व्यक्ति से शादी करने के बाद वीजा पाने में सफलता मिलती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
  • पंचम और बाहरवें भाव के साथ उनके स्वामियों का संबंध शिक्षा के लिए विदेश जाने का योग बनता है। इस योग में जातक पढ़ने के लिए विदेश जा सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
  • दसवें और बाहरवें भाव या उनके स्वामियों का संबंध व्यक्ति को विदेश से व्यापार या नौकरी के अवसर देता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
  • चतुर्थ और नवम भाव का संबंध जातक को पिता के व्यापार के कारण या पिता के धन की सहायता से विदेश ले जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • नवम और बाहरवें भाव का संबंध व्यक्ति को व्यापार या धार्मिक यात्रा के लिए विदेश ले जा सकता है। इस योग में जातक का पिता भी विदेश व्यापार या धार्मिक वृतियों से सम्बन्ध रखता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • लग्नेश सप्तम भाव में हो तो भी जातक विदेश जा कर रह सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : rahu
  • राहु और चन्द्रमा का योग किसी भी भाव में हो जातक को अपनी दशा में विदेश या जन्म स्थान से दूर ले कर जा सकता है।
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