हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है। इनकी सवारी गिद्ध है। अपने हाथों में ये त्रिशूल, धनुष और वरमुद्रा को धारण करते हैं। शनि देव सूर्य देवता के पुत्र हैं। इनका आचरण अपने भाइयों से बिल्कुल ही विपरीत था। मान्यता है कि शनि देव मनुष्यों को उसके पापों का दंड देते हैं। इनका स्वभाव अत्यंत क्रुद्ध माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव के विषय में विस्तृत वर्णन किया गया है। हमारे पौराणिक ग्रंथों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति पर शनि की दृष्टि पड़ जाए, तो वह राजा से रंक बन जाता है। वहीं जिन लोगों पर इनकी कृपा दृष्टि पड़ती है। उनकी किस्मत खुलने में देर नहीं लगती। ऐसे लोगों को जीवन में खूब सफलता मिलती है। मान्यता है कि कुंडली में शनि की स्थिति व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है। कुंडली में जिस स्थान पर शनि ग्रह स्थित होता है, उसे देखते हुए जातकों को कई कार्य नहीं करना चाहिए, जिनका उल्लेख लाल किताब में किया गया है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि कुंडली के किस भाव में शनि ग्रह के होने पर कौन सा कार्य नहीं करना चाहिए?