ज्योतिष गणना में सभी नौ ग्रहों का विशेष स्थान होता है। ये ग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु। सभी ग्रह जातकों पर अलग- अलग प्रभाव डालते हैं। सभी नौ ग्रहों मे शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। मान्यता के अनुसार शनि प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव के पुत्र हैं लेकिन पिता और पुत्र में मतभेद के चलते शनि अपने पिता से नाराज रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी है। शनि की छाया को बहुत ही अशुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में शनि अशुभ भाव में आकर बैठ जाते हैं उनको तमाम तरह की परेशानियां और बीमारियां घेर लेती हैं। वहीं दूसरी तरफ जिन जातकों की कुंडली में शनि शुभ भाव में आकर बैठ जाते हैं उन्हें तमाम तरह की सुख-सुविधाएं, वैभव और धन संपत्ति की प्राप्ति होती है। आइए जानते है शनि के बारे में कुछ खास बातें...