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क्या होता है शूल योग और इस योग में क्यों नहीं करना चाहिए कोई कार्य

Fri, 05 Mar 2021 05:38 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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कुंडली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हिन्दू पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर कोई भी मुहूर्त देखा जाता है। इसी तरह से ज्योतिष में कई शुभ और अशुभ योगों के बारे में बताया जाता है। इसी तरह के ज्योतिष में शूल योग के बारे में बताया गया है। यह योग शुभ नहीं माना जाता है। इस योग में कोई भी कार्य करने को मना किया जाता है। तो चलिए जानते हैं क्या होता है शूल योग और किस तरह होता है इसका निर्माण और इस योग में जन्में जातक का स्वभाव कैसा होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
क्या होता है शूल योग
शूल का अर्थ माना जाता है चुभने वाला शस्त्र। इसी तरह से यदि शूल योग में कोई कार्य किया जाए तो व्यक्ति को कष्टों का सामना करना पड़ता है। इसके द्वारा मिले कष्टों के कारण व्यक्ति के जीवन में आगे लंबे समय तक एक चुभन सी रह जाती है। इसलिए इस योग में कोई भी कार्य करने के लिए मना किया जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
कैसे बनता है शूल योग
ज्योतिष के हिसाब से जब सातों ग्रह किन्हीं तीन राशि में स्थित हो तो है तो शूल योग का निर्माण होता है। यदि किसी जातक की कुंडली शूल योग विद्दमान होता है तो ऐसे जातक को उदर की समस्या रहती है। यानि ऐसे जातक के पेट में कष्टकारी दर्द की समस्या रहती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
शूल योग में जन्मा जातक
शूल योग का स्वामी राहु को माना गया है। इस योग में जन्मे जातक के बारे में माना जाता है कि ये माता के लिए कष्टकारक रहता है। जातक के कई तरह के गलत कर्म में करने की आशंका बनी रहती है। शूल योग में जन्मे जातक में झूठ बोलने जैसी बुरी आदते रहती हैं। गलत कार्यों करने के कारण ऐसा जातक परिवार में बिखराव का कारण भी बनता है। 

शूल योग में जन्में जातक हमेशा बुरे या गलत कार्य नहीं करते हैं इनका एक सकारात्मक पक्ष भी होता है। ये लोग कवि, प्रतापी, शूरवीर कला के तत्व को जानने वाले होते हैं। राहु की शुभ स्थिति के कारण ये लोग सांसारिक और आध्यात्मिक ज्ञान में निपुण होते हैं।
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