14 साल के इंतजार के बाद ही सही, उत्तराखंड में खेल और खिलाड़ियों के दिन बहुरने की उम्मीद अब मजबूत होने लगी है।
खेल विभाग देगा पूरा खर्चा
कैबिनेट बैठक के लिए तैयार खेल नीति में खिलाड़ियों के साथ खेल प्रशिक्षकों का भी ख्याल रखा गया है। नीति में राष्ट्रीय खेल संस्थानों (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स, एनआईएस) में विभिन्न खेलों के प्रशिक्षक बनने का प्रशिक्षण लेने जाने वाले खिलाड़ियों का पूरा खर्चा खेल विभाग द्वारा उठाने का बिंदु भी रखा गया है।
राज्य में लंबे समय से विभिन्न खेलों में प्रशिक्षकों की कमी बनी हुई है। स्थिति यह है कि सभी जिलों में स्थायी खेल प्रशिक्षक रखना भी मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करते आए हैं।
लेकिन, अधिकतर खिलाड़ी भारी खर्च होने के कारण राष्ट्रीय खेल संस्थान में प्रशिक्षक बनने का प्रशिक्षण लेने से कतराते हैं। ऐसे में मणिपुर, हरियाणा आदि राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड खेल विभाग भी प्रशिक्षण का खर्चा उठाने की तैयारी में है। मकसद यह है कि प्रदेश को बेहतर प्रशिक्षक मिल सकें।
राज्य के खेल प्रशिक्षकों को देश-विदेश में विशेष और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधा के लिए खेल विभाग वित्तीय सहायता देने की तैयारी में हैं। वहीं नौकरी में भी राज्य के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन का पुरस्कार नौकरी के रूप में मिलेगा, जिनके लिए कार्मिक विभाग विभिन्न सरकारी विभागों में पदों का चिह्नीकरण, नियुक्ति आदि का काम करेगा।
खिलाड़ियों को प्रोत्साहन
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक विजेताओं को खेल विभाग से नकद पुरस्कार, पेंशन, आर्थिक सहायता और अन्य लाभ दिए जाएंगे
- खेल विभाग ओलंपिक खेलों में विश्व वरीयता सूची में एकल वर्ग में टॉप-10 और टीम वर्ग में टॉप-8 में शामिल राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, यात्रा एवं प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग के दौरान आने वाले खर्च के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा
- ओलंपिक खेल, विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन चैंपियनशिप में पदक विजेता खिलाड़ियों को राज्य सरकार सेवायोजन में प्राथमिकता या वेटेज देगी
- ओलंपिक खेल, विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन चैंपियनशिप में पदक विजेता जो राज्य के लिए भी खेल चुके हों, उनको राज्य के खेल अकादमी खोलने के लिए प्रोत्साहित और मदद की जाएगी
यहां हैं प्रशिक्षण संस्थान
पटियाला, कोलकाता, बंगलुरू, त्रिवेंद्रम (तिरुअनंतपुरम)
एक साल का है पाठ्यक्रम
राष्ट्रीय खेल संस्थानों में खिलाड़ियों को प्रशिक्षक बनने के लिए एक साल का पाठ्यक्रम (कोर्स) करना होता है। इसके तहत जमीनी स्तर से खिलाड़ियों को तैयार करने के तरीके, खास तकनीकें, खेल के प्रोत्साहन के तौर तरीके बताए जाते हैं।
खिलाड़ियों के भोजन, दवाओं, मसाज, स्वास्थ्य आदि की जानकारी भी दी जाती है। किसी खिलाड़ी को कितना, किस तरह अभ्यास कराना चाहिए, यह भी सिखाया जाता है।
यह है खर्चा
अकादमिक शुल्क: 20 हजार रुपए
हॉस्टल शुल्क: 61050 रुपए
ये खिलाड़ी जा सकते हैं संस्थान
- मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम ग्रेजुएशन डिग्री धारक हो
- खेल विशेष में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रतिभाग किया हो
- खेल विशेष में कम से कम दो सीनियर राष्ट्रीय टूर्नामेंट या ऑल इंडिया टूर्नामेंट
- दो बार ऑल इंडिया विश्वविद्यालय या जूनियर और यूथ राष्ट्रीय चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया हो
- तीन बार इंटर सर्विसेज मीट, ऑल इंडिया पुलिस गेम्स और इंटर रेलवे चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया हो
- एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, सीनियर एशियन चैंपियनशिप, ओलंपिक गेम्स, सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेले खिलाड़ियों का 12वीं पास होना जरूरी
- आयु सीमा 20 से 35 वर्ष है