प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का योग पर फोकस बढ़ने और कॉरपोरेट सेक्टर में तनाव से निपटने के लिए पारंपरिक भारतीय तरीकों के प्रति जागरूकता बढ़ने से योग ट्रेनिंग में नौकरियों के अवसर में इजाफा हुआ है।
एक एसोचैम पेपर के मुताबिक अगले कुछ वर्षों में योग प्रशिक्षकों की मांग में सालाना 30-35 फीसदी की दर से बढ़ोत्तरी होगी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसी पहल ने वैश्विक स्तर पर योग को लेकर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है।
वहीं दूसरी तरफ जीवनशैली से जुड़े तनाव के कारण अधिक से अधिक लोग योग को अपना रहे हैं । इसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक की जरूरत होती है।
तनाव के कारण अधिक से अधिक लोग अपना रहे हैं योग
एसोचैम हेल्थ काउंसिल द्वारा तैयार किए गए पत्र के मुताबिक आयोजनों जैसे इंटरनेशनल योगा डे जैसे आयोजनों से भारत में योग पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मौजूदा समय में दुनिया भर में करोड़ों लोग योग का अभ्यास करते हैं।
एसोचैम के जनरल सेक्रेटरी डीएस रावत का कहना है कि योग हेल्थ क्लिनिक्स, आयुर्वेद रिजॉर्ट, हॉलीडे कैंप, कॉरपोरेट ट्रेनिंग आदि के रूप में अरबों डॉलर का बाजार मुहैया करा सकता है।
पेपर के मुताबिक बेरोजगारी ऊंची दर और आधुनिक जीवन में हर रोज बढ़ते दबाव से यह आश्चर्यजनक नहीं है कि योगा शिक्षक की मांग में बड़े पैमाने पर इजाफा हुआ है।
दक्षिण भारत योग का अभ्यास करने में आगे
एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) द्वारा कराए गए प्रीवेंटिव सर्वे से पता चला है कि दक्षिण भारत योग का अभ्यास करने में आगे है।
यहां 30-70 वर्ष आयु समूह के 15 फीसदी लोग दूसरे क्षेत्रों की तुलना में प्रीवेंटिव हेल्थकेयर के उपाय अपना रहे हैं। पश्चिमी क्षेत्र को पूरब और उत्तर पूर्व के बाद तीसरे स्थान पर पंजीकृत किया गया।
योग शिक्षक/ थेरेपिस्ट के तौर पर कैरियर नई पीढ़ी के पेशे के तौर पर उभर रहा जो ग्लैमर और जीवन स्तर को लगातार ऊपर उठाने की संभावनाओं से भरपूर है।
पेपर के तहत योग दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहा है और प्रशिक्षित योग शिक्षकों की कमी है। हाल के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि कॉरपोरेट और कारोबारी कंपनियां अपने कर्मचारियों में तनाव की समस्या से जूझ रहीं हैं।