देश में बढ़ती रेप की घटनाओं के लिए पश्चिमी परिधानों और पश्चिमी संस्कृति को दोषी ठहराया जाता है लेकिन एक एनजीओ ने मध्यप्रदेश में किए गए अपने सर्वे में बताया है कि रेप की घटनाओं की वजह लड़कियों का जींस-टॉप या स्कर्ट पहनना नहीं है।
यह सर्वे मध्य प्रदेश के भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के उस बयान को भी गलत साबित करता है जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं के पश्चिमी परिधान पहनने की वजह से युवाओं में नैतिक मूल्यों का पतन हुआ है।
टीओआई की खबर के अनुसार एनजीओ एक्शन ऐड ने राज्य में पिछले पांच साल की रेप पीड़ित महिलाओं-बच्चियों पर सर्वे किया है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि वारदात के समय 48 फीसदी महिलाओं ने सलवार-कुर्ता, 41 फीसदी ने साडी़ और 11 फीसदी पीड़ित बच्चियों ने फ्रॉक या पायजामा पहना हुआ था।
एनजीओ के भोपाल कार्यालय की क्षेत्रीय निदेशक सारिका सिन्हा ने कहा कि रेप पीड़ितों में से किसी ने भी पुरुषों को उकसाने या उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए छोटे कपडे़ नहीं पहने थे। उन्होंने भाजपा के दोनों नेताओं के बयान को सिरे से खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि दिल्ली में चलती बस में मेडिकल छात्रा से गैंगरेप की घटना के बाद राज्य के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि महिलाओं को लक्ष्मण रेखा नहीं लांघनी चाहिए, नहीं तो 'रावण' उनको अगवा कर लेगा, जैसा कि सीता के साथ हुआ था।
इस पर श्रमिक मजदूर संगठन के संयोजक अनुराग मोदी ने कहा कि क्या मंत्री जी को यह बात मालूम है कि दिसंबर 2010 में जबलपुर में एक 93 साल की बुजुर्ग महिला के साथ उसके पड़ोसी ने रेप किया था। वहीं, दो माह पूर्व सिवनी जिले के घनसोर की चार साल की गुड़िया से उसके चाचा के दोस्त ने दुष्कर्म कर किया था। इन दोनों ने कौन सी लक्ष्मण रेखा लांघी थी।