मध्य प्रदेश के व्यापमं (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटले की जड़ें यूपी में बहुत गहराई तक जमी हुईं हैं। प्रीपीएमटी परीक्षा के लिए पूरे उत्तर प्रदेश से बाकायदा सेंटर बनाकर सॉल्वरों की भर्ती की जाती थी। वाराणसी के अलावा लखनऊ, इलाहाबाद, शाहजहांपुर, झांसी और मेरठ जैसे प्रमुख सेंटरों पर व्यापमं घोटालेबाज आसपास के क्षेत्रों के गरीब और होनहार युवकों को इस काम के लिए फुसलाते थे। ग्वालियर में इंटरव्यू के बाद इन्हें अंतिम तौर पर चुना जाता था। परीक्षा में सफलता दिलाने के बाद एक लाख रुपये तक भुगतान किया जाता था।
वाराणसी के बीएचयू में बीएससी तृतीय वर्ष में पढ़ने वाले अजय यादव की गिरफ्तारी से इस मामले में कई अहम खुलासे हुए हैं। मध्य प्रदेश पुलिस के अनुसार प्रीपीएमटी परीक्षा के लिए ग्वालियर का डॉ. ज्ञान यूपी के विभिन्न हिस्सों से सॉल्वर तलाशता था।
इनमें से एक डॉ. नरेंद्र को इसी तरह फर्जीवाड़ा कर डॉक्टर बनवा दिया, जो बाद में उसका सहयोगी और 2012 में डॉ. ज्ञान की मौत के बाद सॉल्वर जुटाने के गिरोह के सरगना बन गया।