महाराष्ट्र में जल्द की तोता पालना अपराध के तहत शामिल होगा और इस पक्षी को पिंजरे में रख कर पालने वालों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। राज्य के वन विभाग ने यह फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार विभाग जल्दी ही नागरिकों के लिए यह चेतावनी जारी करने जा रहा है कि पालतू तोतों को आजाद करें या फिर जुर्माना भरने के लिए तैयार हो जाएं।
अक्सर तोतों को पिंजरे में बंद करके उनके पंख कतर दिए जाते हैं ताकि वे बाहर आने पर भी उड़ न सकें। उल्लेखनीय है कि तोता इंसानों द्वारा पाला जाने वाला सबसे प्रमुख पक्षी है और इन्हें पकड़ने वाले बड़े रैकेट महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर सक्त्रिस्य हैं।
तस्करी के दौरान हजारों की संख्या में हर साल तोते मारे जाते हैं। महाराष्ट्र की वन्यजीव संस्थाएं लंबे समय से तोते को पालने के विरुद्ध कानून लाने की मांग करती रही हैं।
उनकी मांग पर कार्रवाई की तैयारी करते हुए राज्य के वन विभाग ने वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत कदम उठाने का फैसला कर लिया है।
आम तौर पर नागरिक तोतों को पालतू पक्षी मानते हैं लेकिन वन्यजीव अधिनियम 1972 की धारा-4 के तहत इसे या किसी भी अन्य पक्षी को पिंजरे में कैद रखना या पालना गैरकानूनी है।
देश भर में तोतों की करीब एक दर्जन प्रजातियां मौजूद हैं और सभी संरक्षित हैं। नियमानुसार तोतों को पालने के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी होती है, लेकिन उन्हें पिंजरे में बंद करने वाले यह अनुमति नहीं लेते हैं।