भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन राज्य में आई बाढ़ की वजह से स्थिति बदलती नजर आ रही है।
सरकारी अमला राहत कार्यों में व्यस्त है। ऐसे में चुनाव की तैयारी पर भी सीधा असर पड़ा है। राज्य में लोकतंत्र पहले की तुलना में मजबूत हुआ है, लेकिन कुछ मोर्चों पर चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
जम्मू-कश्मीर में अगले वर्ष जनवरी 2015 तक नई विधानसभा का गठन होना है, लेकिन अब इसकी संभावना न के बराबर है।
भारत में जम्मू-कश्मीर के अलावा अन्य सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव हर पांच साल में होते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान है और उसके हिसाब से राज्य में पांच की बजाए छह साल में विधानसभा चुनाव होते हैं।
राज्य में पिछला विधानसभा चुनाव वर्ष 2008 में हुआ था और अगला चुनाव कुछ ही महीनों में होना चाहिए।
चुनाव कराने के लिए राज्य के प्रशासनिक अमले की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए निर्वाचन आयोग को इस हफ़्ते राज्य का दौरा करना था, लेकिन बाढ़ की वजह से आयोग को अपना दौरा रद्द करना पड़ा।
राज्य में राहत एवं बचाव कार्य जारी है और प्रशासनिक अमला अगले कुछ हफ्तों तक इसी काम में व्यस्त रहेगा।
तब तक सर्दी शुरू हो जाएगी और राज्य के कई हिस्सों में पहुंचना भी मुश्किल होगा। आशंका इस बात की है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है और चुनाव वर्ष 2015 की गर्मियों में ही हो सकेंगे।