जुनूनी इश्क में प्रेमी से मिलकर अपने ही परिवार के सात लोगों की गर्दनें कुल्हाड़ी से काटने वाली शबनम कोर्ट से घोषित ‘खलनायिका’ है। फांसी की सजा मिली है, लेकिन जेल प्रशासन की ओर से तैयार रिपोर्ट की मानें तो इस खलनायिका ने अपने जेल बंदी के दौरान तेजी से सुधार की ओर कदम बढ़ाए हैं।
शबनम के चाल-चलन की बाबत तैयार की गई रिपोर्ट में जेल प्रशासन ने इसकी तस्दीक की है। जेल प्रशासन ने उसे एक अच्छा और अनुशासित बंदी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक उसने जेल में अभी तक बिताए करीब सात सालों में कभी जेल मैनुअल नहीं तोड़ा है। यही नहीं, वह दो सौ से ज्यादा कैदियों को साक्षर भी कर चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रिपोर्ट उसे फायदा पहुंचा सकती है।
शबनम के चाल चलन की रिपोर्ट में जेल प्रशासन ने कहा है कि शबनम पूरे दिन महिला बैरक में महिला बंदियों के बच्चों को पढ़ाती रहती है। वो साथी बंदियों का ध्यान रखती है। उसने सात साल में कभी किसी साथी बंदी से झगड़ा नहीं किया।
शबनम के चाल चलन की बाबत जेल प्रशासन की यह रिपोर्ट शबनम के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। दरअसल शबनम ने शासन द्वारा जेलों में चलाए गए साक्षरता अभियान को लीड किया था और दो सौ से ज्यादा बंदियों को अक्षर ज्ञान कराया था। जेल पहुंचने से पहले शबनम बावनखेड़ी के प्राइमरी स्कूल में शिक्षा मित्र थी।
...और ये है जेल में सलीम का हाल
शबनम के साथ ही सलीम के चाल चलन की बाबत भी मुरादाबाद और आगरा जेल का यही नजरिया है। सलीम जब जेल गया था तो अंगूठा लगाता था और अब सलीम ने जेल अधिकारियों को कई पत्राचार अंग्रेजी भाषा में किए हैं। सलीम कानून की किताबें पढ़ना पसंद करता है। जेल अधिकारियों का कहना है कि वो कानून की किताबों की लगातार डिमांड करता है और पूरी रात उन्हें पढ़ता रहता है।
सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में शबनम-सलीम को किसी भी तरह की रियायत दिए जाने की मुखालफत की जाएगी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक बीआर वर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से शबनम-सलीम की मुखालफत के लिए प्रदेश सरकार ने गर्वमेंट ऑन रिकार्ड को खड़ा करने का फैसला किया है।
उनके पास पूरा रिकार्ड और मुकदमे से जुड़ी सभी फाइलें भिजवा दी गई हैं। सरकार की ओर से गर्वमेंट ऑन रिकार्ड मांग करेंगे कि शबनम-सलीम को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने तलब किए मूल अभिलेख, सुनवाई आज
बावनखेड़ी कांड के गुनहगार शबनम और सलीम की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अमरोहा जिला जज की अदालत और जेल से मूल अभिलेख तलब किए हैं। जिला जेल में अधिकारी पूरा दिन पत्रावली तैयार करते रहे। स्पेशल मैसेंजर के जरिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलब किए गए सभी अभिलेख एडिशनल रजिस्ट्रार को भेज दिए गए हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने शबनम और सलीम की फांसी पर महज 27 मई तक के लिए रोक लगाई है।
जिला जेल की महिला बैरक में बंद शबनम की धड़कने मंगलवार को पूरे दिन बढ़ी रहीं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने शबनम - सलीम की फांसी पर दो दिन के लिए रोक लगा दी थी। बुधवार को इनकी फांसी पर रोक की मियाद पूरी हो रही है। पूरा दिन शबनम जेल की बैरक में गुमसुम रही। कोर्ट की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दर्जनों कागजों पर जेल प्रशासन ने उसके दस्तखत कराए।
सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल रजिस्ट्रार ने जेल अधिकारियों से शबनम से जुड़े सभी मूल अभिलेख तलब किए हैं। जेल प्रशासन ने पूरे दिन इन अभिलेखों को जुटाने के बाद सुप्रीम कोर्ट भेज दिया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच शबनम की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगी। शबनम को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा पर जो दो दिन की रोक लगाई थी, उसे बढ़ा दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट याचिका के निस्तारण तक शबनम - सलीम की फांसी पर रोक लगा सकता है।