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आज से बच्चों को होगा शिक्षा का पूरा हक

Sun, 31 Mar 2013 09:43 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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आज से देश के हर बच्चे को अपने घर, पड़ोस में निशुल्क प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार होगा।
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केंद्र व राज्य सरकारों का यह दायित्व होगा कि वे 6 से 14 साल की उम्र के हर बच्चे को प्रवेश के लिए पर्याप्त स्कूल, शिक्षक तथा अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए।

देश में शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) को लागू करने के बाद सरकारों की जरूरी संसाधन जुटाने के लिए तीन साल की मोहलत दी गई थी, जो पूरी हो गई है, लेकिन तमाम उपाय अब भी अधूरे हैं।
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कैसे मिलेगा अधिकार
स्कूलों में 11 लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं तो आठ लाख से ज्यादा शिक्षक अप्रशिक्षित हैं। हजारों निजी स्कूलों को अभी तक मान्यता नहीं मिली है, जिन्हें नए कानून के अनुसार अब बंद करना होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारें बच्चों को संविधान व कानून के हिसाब से उनका अधिकार कैसे दिला पाएंगी।

स्कूली शिक्षा को संवैधानिक अधिकार के लिए वर्ष 2002 में 86वें संविधान में अनुच्छेद 21-ए जोड़ा गया था। तब से दस साल गुजर गए। पहले सर्वशिक्षा अभियान चलाया गया। फिर राइट टू एजूकेशन बिल के माध्यम से इस अधिकार को अप्रैल 2010 में लागू किया गया।

फैसलों पर अमल नहीं
बच्चों को शिक्षा के अधिकार का प्रस्ताव तीन साल के लिए स्थगित रखा गया था ताकि सभी सरकारें जरूरत के मुताबिक स्कूल, शिक्षा व अन्य तैयारियां पूरी कर सकें। आरटीई कानून में किए गये कई महत्वपूर्ण फैसलों पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है।

सबसे बड़ा संकट देश के उन बड़े राज्यों के सामने है जो पहले से शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हुए थे। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल हैं।

शिक्षकों के लाखों पद खाली
पूरे देश में सरकारी तथा सहायता प्राप्त स्कूलों में 11.87 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें से तीन लाख से ज्यादा सीटें अकेले यूपी में खाली हैं। आरटीई में सभी शिक्षकों का प्रशिक्षित होना जरूरी है।

देश में 8.6 लाख शिक्षक अप्रशिक्षित हैं। इनके प्रशिक्षण के लिए तीन साल में अभी तक नीतियां भी नई तय हो पाई हैं। इस बीच, केंद्र सरकार ने फिर से 13 राज्यों को अप्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती करने की छूट दे दी है। हर स्कूल में मैनेजमेंट कमेटी बनाने का प्रस्ताव है।

नहीं शुरू हो सकी सीसीई
आठवीं तक बच्चों को फेल न करने का फैसला तो लागू हो गया है, लेकिन बृहत्तर एवं सतत मूल्यांकन प्रणाली (सीसीई) कहीं शुरू नहीं हो सकी है। अलबत्ता कई राज्यों में शिक्षकों को अभी तक इस प्रणाली की जानकारी तक नहीं है। आरटीई के तहत इसी तरह के एक दर्जन अन्य फैसलों पर भी तमाम राज्यों में कोई काम नहीं हुआ है।
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कुछ राज्यों ने आरटीई को प्रभावी करने के लिए एक साल की मोहलत मांगी थी, किंतु मानव संसाधन मंत्रालय ने इसे टाल दिया। अब दो अप्रैल को केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक में इस पर चर्चा होगी। बैठक के बाद ही केंद्र सरकार अधूरी तैयारियों के लिए आगे और मोहलत पर कोई फैसला लेगी।
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