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मोदी की कुंडली में राजयोग लेकिन रोड़े भी, 2018 में होगा राहुल का भाग्योदय

Thu, 15 May 2014 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी की कुंडली में प्रबल राजयोग है। वह प्रधानमंत्री बन सकते हैं लेकिन उनकी राह में रोड़े भी कम नहीं होंगे। यह मानना है सौर शास्त्र के ज्ञाताओं का। पं. कामेश्वर उपाध्याय कहते हैं कि ग्रहों की चाल कुछ ऐसी है कि भारत ही नहीं, एशिया के सभी देशों में राजनीतिक और प्राकृतिक उथल-पुथल होगी।
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वहीं, पं. ऋषि द्विवेदी कहते हैं कि मोदी की कुंडली में गोचरदशा में बृहस्पति और शनि की साढ़ेसाती से शुभता में कमी आएगी। मोदी और भारत की कुंडली के आधार पर ज्योतिषीय गणना मोदी और एनडीए के पक्ष में है लेकिन नई सरकार की राह में बाधाओं की आशंका भी बरकरार है।

आचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के मुताबिक मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न और वृश्चिक राशि की है। लग्नेश मंगल और भाग्येश चंद्रमा की युति लग्न में है जिससे प्रबल राजयोग की स्थिति बन रही है। उनके जीवन की सर्वोच्च दशा चंद्रमा की महादशा 2011-2021 तक है।
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सरकार की स्थिरता पर रहेगा संकट

कुंडली के मुताबिक जब महादशा, अंतरदशा, प्रत्यंतर दशा, सूक्ष्म दशा, संध्यापाचक दशा, प्राण दशा एवं गोचर दशा सभी समवर्ती हों तभी पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। मोदी की कुंडली के अनुसार गोचर दशा में पंचम भाव का बृहस्पति कुछ कमी ला रहा है।

इससे मोदी के प्रधानमंत्री बनने का योग तो है लेकिन गोचर में बृहस्पति एवं शनि की साढ़ेसाती शुभता में कमी लाएगा। वहीं, वर्तमान में भारत की कुंडली में सूर्य की महादशा 12 सितंबर 2009 से 2015 तक रहेगी। केतु की अंतरदशा 30 अप्रैल 2014 से वर्षपर्यंत रहेगी।

जनतंत्र की कुर्सी माने जाने वाले राहु-केतु को अस्थिरता का कारक ग्रह माना जाता है। केतु की अंतरदशा में ही चुनाव परिणाम घोषित होंगे और नई सरकार का गठन होगा। भारत की कुंडली कालसर्प दोष से ग्रसित भी है। इस दोष का भी प्रभाव तभी पड़ता है जब राहु-केतु की अंतरदशा चल रही हो। 30 अप्रैल से भारत की कुंडली पर केतु का पूर्ण प्रभाव है। अत: सरकार की स्थिरता पर संकट रहेगा।
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राहुल गांधी का चमकेगा भाग्य

ज्योतिषविद् पं. कामेश्वर उपाध्याय का कहना है कि मोदी की कुंडली में राजयोग की चरम अवस्था है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कोई और ऐसी शख्सियत नहीं जिसकी कुंडली में इतना प्रबल राजयोग हो। मोदी की कुंडली रुचक योग वाली है। ऐसा व्यक्ति सेनापति होता है और राजा भी। उनकी कुंडली में नक्षत्रबंध और योगबंध दोनों मजबूत स्थिति में हैं। इससे उनके प्रधानमंत्री बनने की अधिकाधिक संभावना है। यूपीए की कुंडली के मुताबिक अब यह संगठन वृद्ध हो चुका है। ऐसी स्थिति में एनडीए की ही सरकार बनने के हालात हैं। नई सरकार की स्थिरता मोदी के शपथ ग्रहण के मुहूर्त पर निर्भर है कि वह किस समय शपथ लेते हैं। उन्होंने भद्रा काल में नामांकन किया था, यदि वह फिर इसी काल में शपथ लेंगे तो कई प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। जहां तक राहुल गांधी की बात है तो उनका भाग्योदय 2018 में होगा।
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