उत्तर रेलवे का खान-पान और पानी पूर्णतया शुद्ध नहीं है। खुद रेलवे ने आरटीआई के तहत मांगी सूचना में यह कबूल किया है। आरटीआई एक्टिविस्ट गौरव अग्रवाल ने उत्तर रेलवे से यह सूचना मांगी कि उनके यहां नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और गाजियाबाद रेलवे स्टेशनों पर पिछले पांच साल में खान-पान के सामान के अलावा पानी के कितने नमूने लिए गए और उनमें कितने पास व कितने फेल हुए।
इस सवाल पर वहां से चीफ मेडिकल डायरेक्टर ने अग्रवाल को सूचना दी है। इसके मुताबिक इन स्टेशनों पर पिछले पांच साल में पीने के पानी (पैक्ड) के 1218 नमूने लिए गए। इनमें एक नमूना फेल हुआ, जबकि अन्य सभी पास रहे। खाने-पीने के सामान के 4908 नमूने लिए गए, इसमें 4796 नमूने पास आए और 112 नमूने फेल आए।
अग्रवाल को रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि बिजली से चलने वाली पूरी देश की ट्रेनों पर रोजाना 14,157.87 मिलियन किलोवाट प्रति घंटे बिजली फुंकती है।