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भरी कचहरी में ब्लाक प्रमुख को गोलियों से भूना

डेढ़ दशक से भी ज्यादा वक्त तक सियासत और जुर्म की दुनिया में रिंग मास्टर रहे डिलारी ब्लाक प्रमुख योगेंद्र्र सिंह उर्फ भूरा की सोमवार को कचहरी में पुलिस कस्टडी में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। हत्या की इस सनसनीखेज वारदात से पूरी कचहरी दहल उठी। गोलियों की तड़तड़ाहट से न्यायिक अफसरों और वकीलों में अफरातफरी मच गई।


भूरा के साथियों और पुलिस ने दो हत्यारों को मौके से ही दबोच लिया जबकि चार शूटर भाग निकले। पकड़े गए हमलावरों में से एक उसी छात्र नेता का भाई है जिसकी हत्या में ब्लाक प्रमुख जेल में थे। भूरा की पत्नी ने पांच को नामजद करते हुए आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

भोजपुर के गांव हुमायूंपुर निवासी डिलारी ब्लाक प्रमुख योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा का नाम दो मार्च 2013 को हुई छात्र नेता रिंकू चौधरी की हत्या में प्रकाश में आया था। 20 जनवरी 2014 को भूरा ने इस मामले में कोर्ट में सरेंडर किया था और तभी से जेल में बंद थे। विधानसभा चुनाव के दौरान हुए आर्म्स एक्ट के एक मुकदमे की पेशी के लिए पुलिस सोमवार को सुबह ग्यारह बजे भूरा को जेल से कचहरी लाई थी।


एसीजेएम दो की कोर्ट के दरवाजे पर बनी बेंच पर बैठे भूरा को सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे छात्र नेता रिंकू के भाई सुमित ने पैर छूने के बाद गोली मार दी। सुमित के ममेरे भाई पंकज ने भूरा को दूसरी गोली मारी। पुलिस कस्टडी में लगे सिपाही भी सहमकर पीछे हट गए।

भूरा के भतीजों ने हिम्मत करके पंकज और सुमित को दबोच लिया इतने में सामने से आए चार अन्य शूटरों ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर भूरा को ढेर कर दिया और भाग गए। भूरा को अस्पताल ले जाया गया लेकिन डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

भूरा की पत्नी और सपा नेता पूनम ने छात्र नेता रिंकू चौधरी के पिता रामवीर पुत्र अजब सिंह निवासी नवेनी गद्दी, भाई सुमित, नेमपाल पुत्र करन सिंह निवासी गढ़ी भारतल थाना हजरत नगर गढ़ी, पंकज पुत्र नामालूम निवासी ग्वारऊ थाना बिलारी और निपेंद्र पुत्र राकेश निवासी भाऊपुरा थाना टांडा जिला रामपुर समेत आठ लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

चाचा राम-राम कहा और दाग दी गोलियां

ब्लाक प्रमुख योगेंद्र उर्फ भूरा की हत्या फिल्मी अंदाज में की गई। पेशी के दौरान अपने गुर्गों से घिरा रहने वाला भूरा किसी अनजान से नहीं मिलता था। उसके पास तक केवल वही लोग जा सकते थे जो भूरा के विश्वास पात्र थे। क्योंकि सुमित भूरा का विश्वास हासिल कर चुका था लिहाजा वह आसानी से उस तक पहुंच गया।

वहां जाकर चाचा राम राम कहा और गोली मार दी। पहले गोली सुमित ने मारी और दूसरी पंकज ने। जब इन दोनों को वहां मौजूद लोगों ने पकड़ा तो करीब खड़े दूसरे हमलावरों ने भी गोलियां चला दीं।

जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया उससे साफ है हमलावरों ने फूल प्रूफ प्लान बना रखा था। क्योंकि सुमित को भूरा करीब से जानता था लिहाजा वह आसानी से उसके करीब पहुंच गया। सुमित के साथ पंकज भी था। दोनों भूरा के पास पहुंच गए। सुमित ने भूरा को चाचा कहते हुए राम-राम की।

भूरा ने भी सुमित के सिर पर हाथ फेरा। यहां खड़े दूसरे लोगों से भी हाय हैलो हो गई। कुछ देर बाद सुमित ने फिर कहा कि चाचा चलते हैं। वह थोड़ा सा झुका और तमंचा निकालकर धाड़ से गोली मार दी। पहली गोली सुमित ने ही मारी। जब यहां खड़े लोगों ने सुमित को पकड़ा तो दूसरी गोली पंकज ने मार दी।

बाद में यहां मौजूद दूसरे हमलावरों ने गोलियां चला दीं। उसके शरीर पर कुल छह गोलियां लगी हैं। एक गोली आरपार निकल गई थी जबकि पांच शरीर में धंसी रहीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब सुमित को लोगों ने पकड़ा तो वह हंसकर कहने लगा कि अब क्या फायदा। भूरा चाचा तो चले गए। जब लोग अस्पताल लेकर जा रहे थे तब वह कह रहा था कि कहीं भी ले जाओ बचेगा नहीं।
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जुर्म और सियासत की ‘जुगलबंदी’ था भूरा

योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा जुर्म और सियासत की दुनिया का जाना-माना नाम हो गया था। सियासत में शोहरत हासिल करने और पैसा कमाने की ललक उसे जुर्म की दुनिया में खींच ले गई। पिछले सोलह साल से उसका ‘सिक्का’ चल रहा था। पराग डेयरी का डायरेक्टर बना। लंबे समय तक ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर काबिज था।

कांठ विधानसभा सीट से भी उसने इलेक्शन लड़ा। सभी सियासी पार्टियों के बड़े नेताओं से उसके ताल्लुकात थे। इस दौरान उसके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज होते रहे। कालेज के दिनों में भूरा ने स्पोर्ट्स में खासा नाम कमाया था। वर्ष 1991 में वह यूपी का प्रतिनिधित्व करते हुए स्पोर्ट्स कालेज लखनऊ में भाला फेंक में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल हासिल किया।

वर्ष 1997 में भूरा का एक्सीडेंट हो गया था। इस हादसे में उसका एक दाहिना हाथ कट गया था। वर्ष 1999 से भूरा ने सियासत की दुनिया की कदम रखा और पराग डेयरी का डायरेक्टर बना। उस वक्त भूरा सांसद सर्वेश सिंह का बेहद करीबी माना जाता था।

सांसद ने ही वर्ष 2001 में भूरा को डिलारी ब्लाक से ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ाया और जिताया। वर्ष 2006 में भूरा फिर ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। इस बार दीपक चौहान ब्लाक प्रमुख बन गए थे। वर्ष 2008 में दीपक चौहान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और भूरा फिर ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर काबिज हो गया।

वर्ष 2011 में फिर ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ा और भूरा ब्लाक प्रमुख बन गया। तब से लगातार ब्लाक प्रमुख था। अब क्योंकि लंबे समय से जेल में था लिहाजा वहां कार्यवाहक ब्लाक प्रमुख बना दिया गया था। 2012 में योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा कांठ विधान सभा सीट से महानदल के टिकट पर चुनाव लड़ा।

बाइस हजार वोट लेकर चौथे स्थान पर रहा था। एसएसपी लव कुमार ने बताया कि भूरा के खिलाफ 12 मुकदमे थे जिनमें हत्या के भी थे। कुल मिलाकर भूरा जुर्म और सियासत की ‘जुगलबंदी’ था। सभी पार्टियों में उसके गहरे ताल्लुकात थे। प्रदेश के जितने भी दिग्गज नेता हैं उन सभी के साथ भूरा का उठना बैठना था।
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