पुड़िया में दी गई आयुर्वेद दवा से राजस्थान में अजमेर की सांसद प्रभा ठाकुर की जान सांसत में आ गई है। इस दवा के कारण उनके शरीर में खून बनना ही बंद हो गया और शरीर में मौजूद खून में 70 प्रतिशत तक सीसा (लेड) है। वे लेड पॉयजन की शिकार हो गईं।
हालत बिगड़ने पर दिल्ली के एम्स में इलाज करवाया और अमरीका से दवाएं मंगाई गईं। जब सांसद ने निजी आयुर्वेद चिकित्सक के खिलाफ शिकायत की, तो पुलिस ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया।
सांसद ने केन्द्रीय चिकित्सा मंत्री गुलाम नबी आजाद को चिट्ठी लिखकर पूरा घटनाक्रम बताया, इसके बाद केन्द्र सरकार ने आयुर्वेद निदेशालय को जांच के आदेश दिए हैं।
नबी को लिखी चिट्ठी में प्रभा ठाकुर ने आरोप लगाया कि अजमेर के आयुर्वेद चिकित्सक मनीष दुग्गल ने करीब डेढ़ वर्ष पहले डायबिटीज, एसिडीटी एवं एलर्जी ठीक करने के लिए उन्हें कुछ दवाएं दी थीं।
तबीयत बिगड़ने के बाद एम्स में भर्ती होना पड़ा, तब पता चला कि आयुर्वेद की दवाइयां लेने के बाद शरीर में खून बनना बंद हो गया है। वह एम्स में सात दिन भर्ती रहीं और बोनमेरो टेस्ट कराया।
कुछ दिन बार फिर पेट में तकलीफ हुई, तो बेल्लारी एवं लीवर इंस्टीट्यूट, बसंत कुंज में भर्ती होना पड़ा। यहां पर हुई जांचों में खुलासा हुआ कि उनके खून में 70 प्रतिशत लैड मौजूद है। इसकी वजह से मरीज की मौत हो सकती है या उसकी लीवर व किडनी खराब हो सकती है।
चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि जब अजमेर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया, तो पुलिस ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। आरोपी की फैक्ट्री में छापा मारकर केवल दंतमंजन के नमूने लेकर ही ड्रग कंट्रोलर को भेज दिए।
पुलिस और ड्रग कंट्रोलर से जवाब मिला कि राजस्थान में लैड परीक्षण की सुविधा ही नहीं है। सांसद का आरोप है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली में लैड परीक्षण कराया जा सकता था। लेकिन किसी खास कारणों से ऐसा नहीं किया गया।
सांसद ने पत्र में गुलाम नबी से कहा है कि समय पर मिले उचित इलाज से उनकी जान बच गई, लेकिन आम लोगों का क्या होगा, जिन्हें ऐसे ही चिकित्सकों के पास उपचार कराना पड़ता है।
'- सांसद के मामले में जांच के केन्द्र से निर्देश आ चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र जांच कमेटी का गठन करेंगे।'
आशुतोष गुप्ता, निदेशक आयुर्वेद विभाग, राजस्थान