पीयूष ज्योति की चीखें सुनना चाहता था। इसीलिए 27 जुलाई की रात ज्योति को कार समेत हत्यारोपियों के हवाले करने के बाद उसने ज्योति के मोबाइल पर फोन भी किया था लेकिन तब तक ज्योति की सांसें थम चुकी थीं। पीयूष का फोन हत्यारोपी रेनू ने रिसीव किया और कहा पीयूष तुम्हारा काम हो गया है। ज्योति मर चुकी है। इतना सुनते ही पीयूष ने फोन काट दिया।
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एसएसपी के अनुसार हत्यारोपी रेनू कनौजिया ने बताया कि चलती कार में उसने और सोनू ने ज्योति को लात-घूंसे से पीटना शुरू कर दिया। ज्योति ने बचाव में हाथ-पैर चलाए तो सोनू ने उस पर चाकू से वार करना शुरू कर दिया। जब सोनू थक गया तो उसने चाकू ले लिया और तब तक वार किए जब तक ज्योति की मौत नहीं हो गई। जैसे ही कार गुरुदेव टॉकीज से आगे पहुंची, ज्योति के मोबाइल की घंटी बजी। उसने डरते-डरते फोन रिसीव किया।
उधर से आवाज आई मैं पीयूष बोल रहा हूं, जरा ज्योति की चीखने-चिल्लाने की आवाज सुना दो, दिल में ठंडक पड़ जाएगी। तब रेनू ने कहा कि ज्योति मर चुकी है, कैसे आवाज सुनवा दूं। यह सुनते ही पीयूष ने फोन काट दिया था।
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ज्योति के हाथ में फंसे मिले बाल पीयूष के थे
ज्योति के हाथ में फंसे मिले बाल पीयूष के थे। वारदात वाली रात 27 जुलाई को रेस्टोरेंट से लौटते समय रास्ते में हत्यारोपियों को देखकर पीयूष जब कार रोककर उतरने लगा था तो ज्योति को शक हो गया था और उसने कार से उतर रहे पीयूष के बाल तथा कॉलर पकड़ लिया था।
ज्योति ने पीयूष से कहा था कि तुम कार से न उतरो। मैं सब समझ रही हूं कि तुम क्यों ऐसा कर रहे हो। तुम क्या चाहते हो पर पीयूष ने उसकी बातों को अनसुना किया और ज्योति को झटका देकर कार से बाहर आ गया।
इसी छीनाझपटी में पीयूष के बाल टूटकर ज्योति के हाथ में फंसे रह गए थे। इसके बाद हत्यारोपी कार लेकर चले गए और ज्योति को मार डाला।
पीयूष ने अवधेश को बताया, कैसे क्या करना है
हत्यारोपी रेनू ने पुलिस को बताया कि 27 जुलाई की शाम पीयूष ने अवधेश को फोन करके कहा था कि आज रात हम ज्योति को लेकर रैना मार्केट स्थित वारांडा रेस्टोरेंट पहुंचेंगे। वहां तुम लोग भी पहुंच जाना। वहीं पर कार और ज्योति को पहचनवा देंगे। फिर कुछ देर बाद हम रेस्टोरेंट से बाहर आएंगे और फिर बता देंगे कि कैसे और क्या करना है।
रेनू ने बताया कि तय समय पर वह, अवधेश, सोनू और आशीष रेस्टोरेट के बाहर पहुंच गए। वहां पार्किंग के पास पहले से पीयूष कार में बैठा था। ज्योति भी कार में थी। पीयूष का अवधेश से आमना-सामना हुआ। दोनों में आंखों ही आंखों में इशारा हुआ।
इसके बाद पीयूष ज्योति को लेकर रेस्टोरेंट के अंदर चला गया। थोड़ी देर बाद पीयूष मोबाइल पर बात करते हुए रेस्टोरेंट से बाहर आया। अवधेश के साथ उन लोगों से बातचीत की।
ये था पीयूष का मर्डर प्लान
पीयूष ने कहा कि वह साढ़े 11 बजे के करीब सीएसए से रावतपुर चौराहे की तरफ जाने वाली रोड से कार लेकर निकलेगा। रास्ते में तुम लोग अचानक सामने आ जाना। झगड़ा करना और जबरदस्ती मुझे कार से उतार देना। इसके बाद कार और ज्योति को लेकर तुम लोग भाग जाना। रेनू के मुताबिक पीयूष ने पांच सौ रुपये भी दिए थे। रेनू ने बताया कि इन रुपयों से उन लोगों ने रैना मार्केंट स्थित दुकान से बीयर से चार केन खरीदे। बीयर पी।
इसके बाद आशीष की बाइक पर बैठकर रावतपुर गए। वहां एक दुकान में चाऊमीन खाई। इसी बीच पीयूष का अवधेश के मोबाइल पर फोन आया। पीयूष ने कहा बस दस मिनट के भीतर हम लोग रेस्टोरेंट से निकल रहे हैं, तुम लोग पहुंचो। बकौल रेनू वे लोग फौरन आशीष की बाइक पर बैठकर तय स्थान पर पहुंच गए। इसके बाद वहीं पर टहलने लगे। इसी बीच पीयूष की कार वहां आ गई। कार देखते ही अवधेश बीच सड़क पर पहुंच गया।
पीयूष ने साजिश केतहत कार रोककर अवधेश को गालियां देनी शुरू कर दीं। अवधेश ने भी गाली बकी। इस पर पीयूष ने कार का गेट खोला और बाहर निकलने लगा। तभी ज्योति को पीयूष पर शक हो गया और उसने पीयूष के बाल पकड़ लिए।
कचहरी में वकीलों ने पीयूष को पीटा
पत्नी ज्योति की हत्या के अभियुक्त पीयूष श्याम दासानी को गुरुवार को वकीलों ने कचहरी में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बमुश्किल पुलिस ने उसे बचाते हुए वहां से निकाला और जेल में दाखिल किया। स्वरूप नगर पुलिस ने उसका कस्टडी रिमांड लेने के लिए अर्जी डाली थी। इस पर उसे कोर्ट ने तलब किया था। कोर्ट ने शुक्रवार सुबह आठ से शाम छह बजे तक उसका पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर कर दिया।
बुधवार देर शाम पुलिस ने सीएमएम सत्यदेव गुप्ता की कोर्ट में कस्टडी रिमांड के लिए अर्जी डाली थी। इस पर कोर्ट ने गुरुवार को उसे तलब किया था। जेल से उसे सुबह कोर्ट भेज दिया गया। दोपहर करीब 12 बजे सदर हवालात से उसे निकालकर सीएमएम कोर्ट ले जाया गया। जानकारी पाकर सैकड़ों वकील कोर्ट के बाहर जमा हो गए। इस पर कोतवाली इंस्पेक्टर समेत भारी फोर्स कचहरी पहुंच गया। कोर्ट में पेशी के बाद पुलिस ने पीयूष को कोर्ट केमुख्य दरवाजे से निकालने का प्रयास किया तो वकीलों ने हल्ला मचाते हुए घेरेबंदी की। इस पर पुलिस उसे फिर कोर्ट के अंदर ले गई। कोर्ट से बाहर आने के तीन रास्ते थे। वकीलों ने तीनो रास्ते घेर लिए।
करीब ढाई बजे पुलिस पीयूष को कोर्ट के पिछले रास्ते से निकालकर भागते हुई जाने लगी तो लिफ्ट के पास वकीलों ने उसे पकड़कर छह-सात तमाचे जड़ दिए। बमुश्किल पुलिस ने उसे छुड़ाया सड़क की ओर लेकर आई तो वहां भी वकीलों ने पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए पीयूष को लात-घूसों से पीटा। करीब तीन-चार मिनट तक उसकी पिटाई होती रही। पुलिस ने पीयूष को घसीटकर वकीलों के चुंगल से निकला और गाड़ी में डालकर तेजी से जेल की तरफ ले गई।
ज्योति मर्डर केस में पीयूष श्याम दासानी की प्रेमिका मनीषा मखीजा समेत पांचों अभियुक्तों को सीएमएम सत्यदेव गुप्ता की कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पीयूष के साथ कचहरी में मारपीट से सतर्क हुई पुलिस ने इन सभी अभियुक्तों को भारी सुरक्षा घेरे में कोर्ट में पेश किया।
दोपहर में पीयूष के साथ मारपीट के बाद पुलिस ने अन्य अभियुक्तों को कोर्ट में पेश करने के लिए रणनीति से काम लिया। पुलिस वकीलों का गुस्सा भांप चुकी थी। कुछ महिला वकील मनीषा को सबक सिखाना चाहती थीं। इसलिए वह लोग अन्य अभियुक्तों को कचहरी लाए जाने का इंतजार कर रही थीं। पुलिस अभियुक्तों को काफी देर से ठीक शाम 4:40 बजे लेकर कचहरी पहुंची। अभियुक्तों को पेश करने से पहले कई थानों की फोर्स कचहरी पहुंच चुकी थी। पुलिस का विशेष दस्ता स्वॉट भी आ गया था। पुलिस ने एसएसपी दफ्तर से चेतना चौराहा वाली सड़क पर न्यायिक अफसरों के कोर्ट आने-जाने वाले गेट के सामने गाड़ी रोकी और तेजी से कोर्ट ले जाने लगे।
मनीषा के पैर में दिक्कत थी। इसलिए उसे दो-तीन महिला सिपाही सहारा देकर तेजी से कोर्ट की तरफ ले जा रही थी। मनीषा मुंह ढके थी। सभी अभियुक्तों को पुलिस का सुरक्षा घेरा कवर किए था। पुलिस ने पांडु नगर निवासी मनीषा मखीजा, पांडु नगर निवासी अवधेश, रामचरण की मडैया पांडुनगर निवासी आशीष कश्यप, रेनू और सोनू को सीएमएम कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।