पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सार्वजनिक की गईं फाइलों ने नेताजी की आजाद हिंद फौज (आईएनए) के खजाने के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं। अहम सवाल यह है कि आखिर खजाने का क्या हुआ।
नेताजी के एक परिजन चंद्र बोस मानते हैं कि खजाने का एक हिस्सा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पास था। उनका दावा है कि आजाद हिंद फौज के दो सदस्यों ने इस खजाने का दुरुपयोग किया था। उनमें से एक को बाद में प्रधानमंत्री सचिवालय में नौकरी मिल गई।
बोस सवाल करते हैं कि उस समय नेहरू की अगुवाई वाली कांग्रेस को ही उस खजाने का हिस्सा मिला था। फौज में दो और लोग थे जिन्होंने खजाने का अपने हित में इस्तेमाल किया था।
उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है। जानकारों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय के पास रखी एक बेहद गोपनीय फाइल (संख्या-2(67)/56-71 पीएम) में भी इस बात का जिक्र है कि कांग्रेस की कार्यसमिति की देखरेख में एक ट्रस्ट का गठन किया गया था।