नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विमान हादसे में मौत की थ्योरी पर जांच कमेटी में मतभिन्नता थी। जांच समिति के सदस्य और नेताजी के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस विमान हादसे की रिपोर्ट से पूरी तरह असहमत थे। उन्होंने रिपोर्ट पर दस्तखत नहीं किए और रिपोर्ट संसद में पेश किए जाने से पहले ही दिल्ली छोड़कर कोलकाता चले गए।
इससे नेताजी के जीवित होने की चर्चाओं ने और जोर पकड़ा। हालांकि, जांच समिति के दो सदस्यों ने अपनी ओर से नेताजी की मौत के बारे में कई तथ्य रिपोर्ट में शामिल किए लेकिन इस मुद्दे पर रहस्य बरकरार रहा। नेताजी से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद उनकी मौत के रहस्य के बारे में कई तथ्य उजागर हुए हैं।
बोस ने बाद में अलग से एक रिपोर्ट में जांच समिति की रिपोर्ट से असहमति जाहिर की। बोस ने तब अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विमान हादसे में नेताजी की मौत नहीं हुई और जापान के मंदिर में रखी गई राख उनकी नहीं है। इसलिए उसे वापस नहीं लाया जाना चाहिए। इस संबंध में संसद में सदस्य नबाब सिंह चौहान ने सवाल भी किया था।
19 दिसंबर 1956 को सरकार की ओर से लक्ष्मी एन मेनन द्वारा दिए गए उत्तर
में कहा गया कि सरकार बहुमत यानी दो सदस्यों की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट से
सहमत है। इस तरह बोस की रिपोर्ट और उनका नोट सरकार की ओर से खारिज कर दिया
गया।