दो लाख के इनामी सुकरमपाल उर्फ भगत ने शिमला (हिमाचल प्रदेश) में अपना ठिकाना बना लिया था। वहां विकलांग पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हुए चाऊमीन और मोमोज बेचने का काम करने लगा था। एसटीएफ मेरठ यूनिट ने रविवार शाम मोहाली, पंजाब से उसे गिरफ्तार कर यह खुलासा किया। मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाने में लिखा पढ़ी कर उसे जेल भेज दिया गया।
सोमवार शाम पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता के दौरान एसटीएफ के एसपी बबलू कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बागपत के थाना छपरौली के गांव चांदनहेड़ी निवासी सुकरमपाल उर्फ भगत 2007 से फरार चल रहा था।
शासन ने उस पर दो लाख का इनाम घोषित किया हुआ था। एसटीएफ की टीमें काफी समय से सुकरमपाल की गिरफ्तारी के प्रयास में सूचनाएं इकट्ठा कर रही थीं। इसी बीच मुखबिर से पता चला कि रविवार को सुकरमपाल शिमला से जीरकपुर बस स्टैंड मोहाली पंजाब आने वाला है।
शाम करीब पांच बजे सटीक सूचना पर घेराबंदी कर सुकरमपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से 950 रुपये बरामद हुए। पूछताछ में सुकरमपाल ने वेस्ट यूपी में अंजाम दी वारदातों के बारे में बताया। एसपी एसटीएफ ने बताया कि सुकरमपाल ने अधिकांश वारदातें वेस्ट यूपी के माफिया सुशील मूंछ के कहने पर अंजाम दीं।
वह सुशील मूंछ के शार्प शूटर के तौर पर ही काम करता था। काफी समय से वह शिमला, हिमाचल प्रदेश में रहने लगा और विकलांग युवती से शादी भी कर ली थी। उससे दो बच्चे पैदा हुए। तब से वह चाऊमीन और मोमोज की ठेली लगाने लगा।
इन वारदातों में था वांटेड
2007 में मेडिकल थाना क्षेत्र में डिप्टी जेलर नरेंद्र द्विवेदी हत्याकांड से फरार हुआ। उसी साल बिजनौर में मारपीट, 2009 में खेकड़ा बागपत में बलवा और हत्या, 2010 में छपरौली बागपत में पुलिस मुठभेड़, 2011 में मंसूरपुर मुजफ्फरनगर में कातिलाना हमला, 2011 में सदर बाजार के जिला पंचायत सदस्य संजय गुर्जर हत्याकांड और 2014 में लालकुर्ती क्षेत्र में पीएल शर्मा रोड पर हुए एडवोकेट कृष्णपाल सिंह हत्याकांड में वांटेड चल रहा था। शासन ने उसकी गिरफ्तारी पर 2010 में एक लाख और 2013 में दो लाख रुपये का पुरस्कार घोषित किया था।
साधू का वेश बनाकर छिपा रहता था
सुकरमपाल ने खुद को छिपाए रखने के लिए साधू का वेश बना लेता था। कभी उत्तराखंड तो कभी हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में जाकर मंदिर और धर्मशालाओं के आसपास शरण लेता था। वहां साधुओं की संगत में रहकर उन्हीं जैसा व्यवहार करता था। गले में माला पहनना और सेवादार की भूमिका में उसे कोई पहचान नहीं पाता था। भांग पीने का भी आदी है।
2012 में वह अपने परिवार के साथ ऋषिकेश में एक आश्रम के पास बस्ती में रहने लगा था। तब सूचना मिलने पर एसटीएफ ने घेराबंदी की थी, लेकिन वहां पागल हाथी द्वारा एक व्यक्ति को मारने से मची भगदड़ के कारण सुकरमपाल अपने परिवार को लेकर भाग निकला था। इसी तरह शनिवार को भी वह शिमला से स्वर्ण मंदिर अमृतसर जाने वाला था। एसपी एसटीएफ के मुताबिक सुकरमपाल शुरू से ही पूजापाठ और मंदिर-आश्रम में सेवा करता था, जिसके चलते उसके नाम के साथ भगत भी जुड़ गया था।