फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न्यूयॉर्क में हो सकती है मोदी-नवाज की मुलाकात

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महीने के आखिर में अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से न्यूयॉर्क में मुलाकात हो सकती है। यह मुलाकात भारत के बीएसएफ और पाक रेंजर्स के डीजी के बीच होने वाली बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी।
विज्ञापन


अगर इस बातचीत के सकारात्मक नतीजे निकले तो फिर भारत को इस मुलाकात पर कोई ऐतराज नहीं होगा। हालांकि बीएसएफ के महानिदेशक और रेंजर्स के महानिदेशक के बीच बातचीत का अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

भारत ने इस वार्ता के लिए 9 से 13 सितंबर की तारीख दी है। हुर्रियत नेताओं से मुलाकात की पाकिस्तान की जिद के कारण दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बातचीत रद्द हो गई। एनएसए वार्ता के रद्द होने के बाद असमंजस के बीच बीएसएफ-रेंजर्स के डीजी की बातचीत की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन


उच्च पदस्थ सूत्र के मुताबिक सितंबर के आखिर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र आम सभा की बैठक में मोदी-नवाज की मुलाकात संभव है। भारत ने मुलाकात का विकल्प खुला रखा है। हालांकि मुलाकात की संभावना बीएसएफ-पाक रेंजर्स के डीजी की बातचीत के नतीजों पर बहुत हद तक निर्भर करेगा।

उक्त सूत्र के मुताबिक पाकिस्तान ने अब तक इस बातचीत पर अपनी अंतिम सहमति नहीं दी है, मगर ज्यादा संभावना यह है कि एनएसए स्तर की वार्ता की तरह पाकिस्तान बीएसएफ-रेंजर्स की बातचीत से किनारा नहीं करेगा।

चूंकि इस बातचीत में सीजफायर उल्लंघन और सीमा पर शांति बहाली पर बातचीत होगी, इसलिए एनएसए स्तर की बातचीत की तरह इसे लेकर ज्यादा तनाव नहीं है।
विज्ञापन

संघ के रुख से भी बंधी उम्मीद

पाकिस्तान से रिश्तों पर संघ के सकारात्मक रुख से भी दोनों देशों के बीच बातचीत की नए सिरे से पहल की उम्मीद बढ़ी है। समन्वय बैठक के बाद संघ ने अप्रत्याशित रूप से पाकिस्तान को न केवल परिवार का सदस्य बताया, बल्कि संवाद की जरूरत भी बताई।

संघ ने अप्रत्याशित रूप से कौरव-पांडवों के बीच झगड़े के बावजूद बातचीत होते रहने की बात कर सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी दे दी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार ने संघ को पाकिस्तान नीति के प्रति विश्वास में लिया है।

चूंकि पाकिस्तान से रिश्ते बनाने के मामले में भाजपा और सरकार को संघ और इसके अनुषांगिक संगठनों से ही विरोध झेलने का हमेशा से अंदेशा रहा है, इसलिए संघ के वर्तमान सकारात्मक रुख को बेहद संजीदगी से लिया जा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें