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‘उम्रकैद मतलब 20 साल की सजा’

Mon, 07 Jan 2013 11:28 PM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
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उम्रकैद मतलब 20 साल की सजा। सुप्रीम कोर्ट ने जेल में आजीवन कारावास भुगत रहे एक आतंकवादी के इस दावे पर पंजाब सरकार और पटियाला के नाभा जेल अधीक्षक से जवाब-तलब किया है। कारागार में 20 साल से बंद आतंकी ने सर्वोच्च अदालत से कहा है कि उसकी सजा पूरी हो चुकी है और अब उसे रिहा किया जाना चाहिए, क्योंकि कानून के मुताबिक उम्रकैद की सजा की अवधि 20 साल ही है।
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जस्टिस पी. सदाशिवम् व जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने जुलाई, 1992 से जेल में बंद लाल सिंह उर्फ मंजीत सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता बलवंद सिंह की ओर से दिए गए तर्कों पर नोटिस जारी किया। मंजीत के खिलाफ सीबीआई ने आतंकवाद व अशांतिकारक गतिविधि (बचाव) अधिनियम (टाडा) के तहत मामला दर्ज किया था।

न्यायपालिका ने उसे जनवरी, 1997 में इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पीठ के समक्ष अधिवक्ता ने तर्क दिया कि रैमिशन एंड रिलीज (छूट एवं रिहाई) नियम 1908 के नियम 2(फ) में 9 मार्च, 1962 में संशोधन किया गया था। इसके साथ में नियम 21 रैमिशन एंड शार्ट सेंटेंसिंग (छूट एवं लघु सजा) नियम भी शामिल था। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि उम्रकैद की सजा की अवधि 20 साल रहेगी। इसमें दी जाने वाली छूट की अवधि भी शामिल है।
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आतंकी की ओर से दायर याचिका में 9 मार्च, 1962 को जारी की गई अधिसूचना का हवाला दिया गया है। यह अधिसूचना गृह जेल विभाग की ओर से जारी की गई थी, जिसमें उम्रकैदी का मतलब उस कैदी से है जो सजा के तौर पर 20 साल जेल में गुजारेगा। पीठ के समक्ष अधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार को अब मेरे मुवक्किल को जेल में रखने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि वह 20 साल से भी ज्यादा अवधि की कैद काट चुका है। राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई कार्यकारी आदेश नहीं जारी किया गया है जिसमें यह स्पष्ट किया गया हो कि उम्रकैद बीस साल से ज्यादा अवधि की है। पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए राज्य सरकार और जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
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