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आईएनएस कोलकाता खुद की सुरक्षा में है कितना सक्षम?

Sun, 17 Aug 2014 08:01 PM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
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वैसे तो स्वदेश निर्मित सबसे आधुनिक युद्धपोत आईएनएस कोलकाता नौसेना के हवाले किया जा चुका है लेकिन इसमें ऐसी कई कमियां जो इसे दुश्मन से मुकाबले में कमजोर साबित कर सकता है।
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दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइल हमले से निपटने के लिए युद्धपोत में जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम लगाई जानी थी लेकिन यह काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है।

वर्ष 2005 में 2606 करोड़ रुपये की लागत से डीआरडीओ और इस्राइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने इस सिस्टम को विकसित करने का काम शुरू किया था, लेकिन यह परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
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हमलावर मिसाइलों और पनडुब्बियों से बचाव कैसे?

इस सिस्टम के जरिए 70 किमी दूर ही दुश्मन को विमानों को मार गिराने की योजना थी। इसी तरह दुश्मन की पनडुब्बियों को समय रहते पकड़ने के लिए आईएनएस कोलकाता में लाइट टोड एरो सोनार उपकरण लगाया जाना था लेकिन यह काम भी अभी पूरा नहीं हो पाया है।

114 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पूरा करने में डीआरडीओ विफल हो गया, तो नौसेना ने इसे विदेश से खरीदने की योजना बनाई, लेकिन अभी तक इसकी खरीददारी को भी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

इतना ही नहीं आईएनएस कोलकाता के मुख्य इंजन की आपूर्ति यूक्रेन ने की है जो इन दिनों खुद युद्ध झेल रहा है। ऐसे में लंबे समय तक उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

पीएम मोदी ने इसे राष्ट्र को किया समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वदेश में निर्मित सबसे विशाल जंगी जहाज आईएनएस कोलकाता को राष्ट्र को समर्पित किया।

मुंबई के मझगांव डॉक लिमिटेड द्वारा निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल से लैस युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से भारत दुनिया के उन देशों की कतार में खड़ा हो गया है जो युद्धपोत से 400 किमी तक दुश्मन को मार गिराने में सक्षम हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुनिया में भारत के बुद्धिबल और बाहुबल का परिचय है।
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स्वदेश में हुआ है निर्मित

प्रधानमंत्री ने इसे भारत की शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह भारतीय इंजीनियरों, तकनीशियनों और सुरक्षा विशेषज्ञों के ज्ञान कौशल का बेहतरीन उदाहरण है।

आईएनएस कोलकाता युद्धपोत का आधार 2003 में तैयार किया गया था लेकिन इसे तैयार होने में 11 साल लग गए। इसकी डिजाइन भारतीय नौसेना के डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। यह अपनी श्रेणी का पहला युद्धपोत है।

अन्य दो युद्धपोत आईएनएस कोच्चि और आईएनएस चेन्नई के 2015 तक नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है। इस मौके पर प्रधानमंत्री के साथ रक्षामंत्री अरुण जेटली, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और नौसेना प्रमुख एडमिरल आरके धवन भी मौजूद थे।
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