गुरू-शिष्य परंपरा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण मानते हुए गुरू द्रोणाचार्य के नाम पर खेल प्रशिक्षकों को दिया जाने वाला द्रोणाचार्य अवार्ड देश के हर कोच का सपना होता है। लेकिन संसद में मंगलववार को यह सवाल खड़ा कर दिया गया कि खेल प्रशिक्षकों को गुरू द्रोणाचार्य के नाम पर अवार्ड क्यों दिया जा रहा है।
पलक्कड़ से माकपा सांसद एमबी राजेश ने खेल मंत्री से जब यह सवाल पूछा तो उनका तर्क था कि उन्हें इस बात से कोई गुरेज नहीं है कि द्रोणाचार्य के एक महान गुरू थे, लेकिन वह ऐसे गुरू थे जिन्होंने अपने शिष्य से ही गुरू दक्षिणा के नाम पर अंगूठा मांग लिया था।
सांसद का इतना कहना था कि भाजपा सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। यहां तक लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी इस पर एतराज जताते हुए कहा कि यह कैसा प्रश्न है?