विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के आग्रह के बावजूद भाजपा अब राम मंदिर की ओर नहीं लौटती दिख रही है। दिल्ली में एक से तीन मार्च तक राष्ट्रीय कार्यकारिणी व राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पार्टी राम मंदिर की बजाए हिंदू आतंकवाद पर ज्यादा जोर देती दिखेगी।
आतंकी अजमल कसाब और अफजल गुरु को फांसी मिल जाने के बाद वैसे भी भाजपा के हाथ से आतंक का मुद्दा छिनता दिख रहा है, ऐसे में माना जा रहा है कि अब भाजपा हिंदू आतंकवाद के मसले पर यूपीए सरकार खासतौर पर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को घेरेगी।
दो दुर्दांत आतंकियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के बावजूद शिंदे को भाजपा माफ करने को तैयार नहीं है। पार्टी नेता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि शिंदे पर भाजपा का रुख कायम है औरअफजल को फांसी तो जनता के दबाव में दी गई। भाजपा के इस रुख से साफ है कि अब वह हिंदू आतंक के मुद्दे को छोड़ने नहीं जा रही है। सूत्रों के अनुसार परिषद की बैठक में पेश होने जा रहे राजनीतिक प्रस्ताव में हिंदू आतंकवाद का मसला शामिल रहेगा।
दरअसल, लोकसभा चुनाव निकट देख रही भाजपा का ध्यान अब विकास और सुशासन पर ज्यादा है। इसलिए राजनीतिक प्रस्ताव में पहले की तरह राम मंदिर का जिक्र भर रहेगा और इसमें अयोध्या में भव्य राममंदिर के निर्माण का संकल्प जताया जाएगा। दूसरा प्रस्ताव देश की अर्थव्यवस्था पर रहेगा। इसमें बदहाल अर्थव्यवस्था से लेकर महंगाई आदि मुद्दों पर यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जाएगी।
कृषि समेत प्रमुख विषयों पर भी अलग से प्रस्ताव लाने पर विचार हो रहा है, लेकिन समय की कमी के चलते अभी तक दो ही प्रस्तावों की योजना है। इस मौके पर कम से कम आठ नेता भी बोलेंगे। भाजपा भी मान रही है कि बोलने के लिए सबसे ज्यादा मोदी की मांग रहेगी। इसलिए अब मोदी के अलावा अन्य मुख्यमंत्रियों को भी बोलने का मौका दिया जा सकता है।
चूंकि उन दिनों संसद का बजट सत्र भी जारी रहेगा। इसलिए भाजपा का पूरा ध्यान यूपीए सरकार को घेरने में रहेगा। इसलिए अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, डॉ मुरली मनोहर जोशी. वैंकेया नायडू, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज व राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के भाषणों में लगभग सभी बातें आ जाएंगी। इसलिए पार्टी ज्यादा प्रस्ताव लाने के पक्ष में नहीं है।