मुरादाबाद के कांठ में बवाल और पिछले दिनों बरेली में साध्वी प्राची से अभद्रता के बाद चर्चा में आए एसएसपी बरेली धर्मवीर यादव पब्लिक के पुलिस पर हावी होने पर बृहस्पतिवार को एक बार फिर आपा खो बैठे हैं। इस बार भी सामने भाजपा नेता थे। उन्होंने बीच सड़क भाजपा नेता अजय जेटली की पिटाई कर दी। इससे गुस्साए भाजपा नेता एसएसपी के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाने लगे हैं। हाईक मान से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक से उनकी शिकायत कर दी गई है।
फतेहगंज पश्चिमी में बवाल के दौरान दोपहर करीब बारह बजे एसएसपी धर्मवीर यादव मौके पर पहुंचे तो हालात काफी सामान्य हो चुके थे। लोधी चौराहा और पुलिस चौकी के बीच भीड़ में भाजपा नेता अजय जेटली और तेजेश्वरी सिंह भी शामिल थीं। युवाओं के गुस्से के आगे पुलिस बेबस बनी हुई थी। इसी बीच एसएसपी धर्मवीर यादव पहुंचे। वह पुलिस कर्मियों के चोटिल होने पर पहले से गुस्से में थे। उन्होंने आते ही अजय जेटली से पूछा कौन हो तुम? उन्होंने खुद को भाजपा नेता बताया तो वह आपा खो बैठे। उन्होंने पहले जेटली को खरी-खोटी सुनाईं। इसके बाद बात इतनी बढ़ गई कि अजय जेटली की बीच सड़क पर पिटाई कर दी। सिपाहियों ने भी जेटली को कई डंडे मारे।
एसएसपी का गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ, उन्होंने सर्च अभियान चलवाकर पुलिस की ताकत का लोगों को एहसास करा दिया। हालांकि इस दौरान कुछ बेगुनाह लोग भी पुलिस के हाथों पिट गए। इससे पहले प्रियांगी गंगवार मर्डर केस में पैरवी करने आईं साध्वी प्राची ने भी एसएसपी पर अभद्रता का आरोप लगा था। उन्होंने इस मामले की शिकायत डीआईजी से करके मामले की जांच कराने की मांग की थी।
डीएम देखते रहे और एसएसपी पीटते रहे
पुलिस की पिटाई से घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती भाजपा नेता अजय जेटली ने कहा, ‘मुझे एडीएम और एसपी सिटी ने फतेहगंज पश्चिमी में बवाल करने वालों को समझाने के लिए भेजा था। मैं पुलिस चौकी में बैठकर एसपी देहात से बात कर रहा था। इसी दौरान डीएम-एसएसपी यहां पहुंचे। मैं बात ही कर रहा था कि एसएसपी ने बलवाइयों को खुद शांत करने की बात कहते हुए मेरी पिटाई शुरू कर दी और डीएम देखते रहे। एसपी देहात और कुछ मीडिया कर्मियों ने मुझे बचाकर गाड़ी में बैठाकर शहर में अस्पताल के लिए भेजा।’
एसएसपी को नहीं हटाया तो सीएम आवास पर दूंगी धरना
भाजपा प्रदेश कार्य समिति की सदस्य तेजेश्वरी सिंह ने कहा कि एसएसपी ने अजय जेटली को पीटकर बर्बरता का परिचय दिया है। प्रदेश सरकार ने अगर तीन दिन में एसएसपी को नहीं हटाया तो वह पार्टी नेताओं से विचार विमर्श कर मुख्यमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठ जाएंगी। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ तो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के आवास का घेराव करेंगी। उन्होंने कहा कि वह और अजय जेटली फतेहगंज चौकी में बैठकर शांतिप्रिय ढंग से एसपी देहात से मामले को निपटवाने की बात कर रहे थे लेकिन उनके सामने ही यहां पहुंचे एसएसपी ने अजय जेटली की पिटाई कर दी।
प्रशासनिक अधिकारियों के कहने पर गए थे भाजपा नेता
फतेहगंज पश्चिमी में हुए बवाल में एसएसपी और पुलिस की पिटाई का शिकार हुए अजय जेटली को प्रशासन ने ही वहां भेजा था। हालांकि बवाल के दौरान उन्हें वहां कोई पहचान नहीं पाया और वह पिटाई के शिकार हो गए। अजय जेटली भाजपा विधायक राजेश अग्रवाल के प्रतिनिधि हैं। वहीं एसएसपी पर अभद्रता का आरोप लगाने वाली तेजेश्वरी सिंह प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य हैं।
अजय जेटली का कहना है कि सुबह बवाल की सूचना पर एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने उनसे बात की थी। उसके बाद वह मौके पर पहुंचे थे। आमतौर पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी इस तरह के प्रयोग करते रहे हैं। सावन और मोहर्रम के दौरान तनाव वाले विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों के मुअज्जिज लोगों को विश्वास में लेकर घटना स्थलों पर भेजा था। प्रशासन की यह रणनीति काम भी आई थी और मामला तूल पकड़ने के बाद बरेली में किसी भी प्रकार अप्रिय घटना नहीं होने पाई थी। बुधवार की घटना के बाद गुरुवार सुबह बवाल होने पर एडीएम सिटी आलोक कुमार और एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा ने अजय जेटली को बात करने के लिए भेजा था।
अजय जेटली का कहना है कि प्रशासन के कहने के बाद वह मौके पर गए थे। लोगों को समझा रहे थे और पुलिस ने मुझे ही पीट दिए। इस बाबत जब एडीएम सिटी आलोक कुमार से बात की गई तो उनका कहना था कि सुबह अजय से बात हुई थी। एसपी सिटी से भी बात हुई थी और एसपीआरए को भी बताया गया था। वहीं एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा का कहना है कि एडीएम सिटी के पास अजय का फोन आया था। उन्होंने मुझे अजय के वहां जाने के बारे में बताया तो इसकी जानकारी एसपीआरए को दे दी गई थी।
बरेली के जिलाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि पुलिस भीड़ को नियंत्रित कर रही थी। वहां लोग अजय जेटली को नहीं पहचान पाए और उन्होंने जाने के लिए कह दिया। वह अपना परिचय भी नहीं दे पाए। परिचय मिलने पर उन्हें ससम्मान भिजवा दिया गया था।
'एसएसपी बताएं अजय की गलती क्या थी'
कैंट विधायक राजेश अग्रवाल का कहना है कि पुलिस प्रशासन बताए क्या दफा 144 में कहीं जाना जुर्म है। अजय तो अकेले गए थे। मैं पहले एसएसपी धर्मवीर से जानना चाहता हूं जो यह मान के चलते हैं कि कांठ में झंडे गाड़ दिए, मथुरा में सांप्रदायिक संघर्ष करा दिया, क्या प्रजातंत्र में तानाशाही चलती है। अगर उन्हें डिक्टेटरशिप करनी है तो इस्तीफा देकर नीचे आएं फिर जनता से बात करें। राजनीतिक दल के कार्यकर्ता को अधिकार है कि वह जनता के सुख दुख में जाए। यहां तो अधिकारियों ने अजय को बुलाया था कि हमारी समस्या का समाधान करा दो। एसएसपी मेरी बात का सार्वजनिक रूप से जवाब दें। यह सोची समझी साजिश है कि इस शांत बरेली को इतना उकसा दो कि यहां भी महीने महीने भर कर्फ्यू लगाएं और अपनी दुकानें चलाएं। कौन सा कारण था कि तीन महीने में इतनी घटनाएं हो जाती है और वह भी पुलिस की नाक के नीचे। मैंने डीएम से भी बात कर ली और सीएम से भी। लखनऊ और दिल्ली में बता दिया है।
कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन का कहना है कि कुछ लोग देश में दंगा कराना चाहते हैं। वह लगातार अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं। ऐसे लोग इसका राजनीतिक लाभ न ले सकें इसलिए अमन पसंद जनता को संयम से काम लेना चाहिए।
कार्रवाई नहीं हुई तो पदयात्रा करूंगी
साध्वी प्राची का कहना है कि एसएसपी बरेली की व्यवहार ठीक नहीं है। वह सपा के कार्यकर्ताओं की तरह गुंडई कर रहे हैं। धर्मस्थल पर मांस डालने वालों के प्रति उत्तेजित लोगों को समझाने गए भाजपा नेता के साथ एसएसपी ने मारपीट कर दी। वह आजम खां के इशारे पर काम रहे हैं। उनके खिलाफ सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो संतों के साथ हरिद्वार से पदयात्रा करूंगी।
कांठ में एसएसपी का कारनामा
कांठ में बवाल के दौरान गलतफहमी का शिकार हुए एसएसपी धर्मवीर ने महापंचायत स्थल गेट पर भाजपाइयों की गिरफ्तारी कर रहे एसडीएम/एसीएम मुरादाबाद को भाजपा कार्यकर्ता समझकर पीट दिया था। पहले उन्हें थप्पड़ मारे फिर लाठी उठाकर पिटाई की। एसडीएम को पिटता देख एक तहसीलदार ने दौड़कर डीएम को सूचना दी तब जाकर एसएसपी ठहरे। इस बीच एसडीएम खुद को मजिस्ट्रेट बताते हुए चिल्लाते रहे लेकिन एसएसपी ने उनकी एक नहीं सुनी।
कांठ में एसडीएम रहे एसीएम विजयपाल सिंह थाने से चंद कदम की दूरी पर स्थित महापंचायत स्थल में घुसने की कोशिश कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी कर रहे थे। इस बीच उनकी पुलिस की भाजपा कार्यकर्ताओं से धक्का मुक्की भी हुई। इतने में एसएसपी धर्मवीर वहां आ गए। उन्होंने भाजपाइयों पर लाठीचार्ज करा दिया। एसएसपी खुद भी भाजपा कार्यकर्ताओं को पीटने लगे। इस बीच उन्होंने एसडीएम को भी भाजपा कार्यकर्ता समझकर पीट दिया।
विजयपाल सिंह का कहना था कि वह एसडीएम हैं लेकिन एसएसपी ने एक नहीं सुनी। कांठ के पूर्व तहसीलदार राजेश वर्मा ने जब एसडीएम को एसएसपी के हाथों पिटते देखा तो तुरंत थाने में बैठे डीएम को दौड़कर जानकारी दी। जिसके बाद डीएम मौके पर आए और एसएसपी को रोका। जिसके बाद एसएसपी ने एसडीएम से सॉरी बोला और डीएम ने दोनों अधिकारियों के हाथ मिलवाए। बाद में दोनों अधिकारी ऐसी किसी घटना से मुकरने लगे।