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अब AFSPA पर भी नरम पड़ी भाजपा

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भारतीय जनता पार्टी जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों से सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) हटाने के लिए तैयार हो गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ गठबंधन कर पिछले महीने जम्मू-कश्मीर की सत्ता पर काबिज हुई भाजपा अब तक आफ्स्पा को हटाए जाने की दलीलों का कड़ा विरोध करती रही हैं।
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हालांकि पहली बार पार्टी ने अपने रुख में लचीलापन दिखाते हुए जम्मू-कश्मीर के अपेक्षाकृत शांत इलाकों से आंशिक रूप से आफ्स्पा हटाने की वकालत की है।

जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ भाजपा नेता सोफी युसुफ ने कहा कि जहां-जहां भी आफ्स्पा को हटाए जाने की आवश्यकता है, वहां से उसे हटाया जा सकता है। बीजेपी ऐसे निर्णयों के साथ है। उन्होंने कहा, 'जहां से आफ्स्पा को हटाना जरूरी नहीं है, वहां उसे लागू रखा जाए।' हालांकि सोफी युसुफ कश्मीर से कानून को हटाने के पक्ष में नहीं है।
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पीडीपी ने आफ्स्पा पर चर्चा के लिए आयोजित की कांफ्रेंस

कश्मीर के आफ्स्पा लागू रखने के पक्ष में सोफी की दलील है, 'आफ्स्पा को उन इलाकों में कतई खत्म नहीं किया जाना चाहिए, जहां लोगों को और देश को खतरा है।' सोफी ने कहा कि जैसा हमारे मुख्यमंत्री (जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्‍मद सईद) कहते हैं कि जहां-जहां से आफ्स्पा को हटाने की आवश्यकता है, वहां से इसे हटा देना चा‌‌‌हिए।

उल्लेखनीय है कि आफ्स्पा को हटाने का मुद्दा जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी पीडीपी के कोर एजेंडे में रहा है। हालांकि भाजपा कानून को हटाने के विरोध में रही है। कश्मीर में सरकार बनाने से पहले भी दोनों दलों ने इस मुद्दे पर चर्चा की ‌थी।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने आफ्स्पा के मुद्दे पर चर्चा के लिए सिविल-मिलिट्री कांफ्रेंस आयोजित की है। कांफ्रेंस में कश्मीर में अपेक्षाकृत शांत इलाकों से आफ्स्पा को हटाने पर चर्चा हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि आफ्स्पा जम्मू-कश्मीर समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लागू है। म‌णिपुर में सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला लगभग 15 साल से आफ्स्पा हटाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रही हैं।
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