दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म की घटना के खिलाफ देशभर में हुए उग्र विरोध प्रदर्शन आखिरकार रंग लाए।
उम्रकैद और मौत की सजा जैसे कड़े प्रावधानों वाला दुष्कर्म रोधी कानून बुधवार से पूरे देश में लागू हो गया है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को इस कानून को मंजूरी दी।
इसमें दुष्कर्म के अलावा तेजाबी हमले, पीछा करने और घूरने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, यह कानून आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013 के नाम से जाना जाएगा।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म की घटना के खिलाफ उमडे़ जनाक्रोश में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए देशभर से कडे़ कानून बनाने की मांग उठी थी।
इस कानून को लोकसभा ने तमाम संशोधनों के साथ 19 मार्च को, जबकि राज्यसभा ने 21 मार्च को पारित कर दिया था। इसके लिए तीन फरवरी को अध्यादेश जारी किए गए थे।
सश्रम उम्रकैद का प्रावधान
कानून के तहत दुष्कर्म जैसे अपराधों में दोषी को सश्रम उम्रकैद का प्रावधान किया गया है, जो किसी भी दशा में 20 साल से कम नहीं होगी।
यही नहीं इस तरह के अपराधों के लिए दोबारा दोषी पाए गए अपराधी को फांसी की सजा का प्रावधान भी है। इस कानून में महिलाओं का पीछा करने, ताक-झांक करने व घूरने को भी पहली बार पारिभाषित किया गया है।
ऐसे मामलों में पहली बार सिर्फ सख्त चेतावनी देकर छोड़ने के बाद दोबारा इस तरह की हरकत करने पर इसे गैर जमानती अपराध माना जाएगा।
सहमति से सेक्स की उम्र 18 साल
इस प्रावधान की कई महिला संगठनों ने जबरदस्त मांग की थी। वहीं, महिलाओं पर तेजाब से हमला करने वालों को 10 साल की कैद की सजा का प्रावधान है।
कानून में सहमति से सेक्स करने की उम्र 18 साल ही रखी है। देश के सभी अस्पतालों को इस कानून के दायरे में लाया गया है।
इसमें कहा गया है कि सभी अस्पतालों को दुष्कर्म की शिकार और तेजाबी हमले की पीड़िता को निशुल्क प्राथमिक उपचार और इलाज करना होगा।
भारी पड़ेगा लापरवाही बरतना
इसमें लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है। अगर दुष्कर्म पीड़िता स्थायी और अस्थायी रूप से मानसिक और शारीरिक तौर पर अक्षम है तो दुभाषिए या फिर विशेष शिक्षक की मदद से न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उसके बयान को रिकॉर्ड किया जाएगा।
इस दौरान पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी भी की जाएगी। कानून बनाने के लिए इसके लिए भारतीय दंड संहिता, अपराध प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम की कई धाराओं में संशोधन किए गए।