एक ओर जहां बेनी प्रसाद वर्मा और मुलायम सिंह यादव की तनातनी को शायद अब सपा और कांग्रेस दोनों ही खत्म करना चाहते हैं।
वहीं दूसरी ओर बेनी प्रसाद वर्मा की राज्य सभा सांसद अमर सिंह से मुलाकात ने अटकलों का बाजार गर्मा दिया है।
इसे बेनी का सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को चिढ़ाने की एक और कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
युद्धविराम के पक्ष में
मुलायम सिंह ने जहां पार्टी नेताओं को बेनी प्रसाद वर्मा पर टिप्पणी नहीं करने की हिदायत दी है तो दूसरी तरफ कांग्रेस हाईकमान की ओर से भी कुछ इसी तरह की पाबंदी की बात कही गई है।
खुद बेनी प्रसाद वर्मा को भी फिलहाल संयम बरतने के लिए कहा गया है। वहीं पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने इस सिलसिले में बेबाक टिप्पणी करने वाले कुछ नेताओं को फोन कर चुप रहने की नसीहत दी है।
बेनी प्रसाद वर्मा ने कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी से बुधवार को मुलाकात की। वर्मा ने कहा कि अगर उधर (सपा की ओर) से सीजफायर है तो इधर भी सीजफायर है।
मुलाकात पर चुप्पी
बेनी इससे पहले सपा से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले अमर सिंह से मिले थे। दोनों नेताओं के बीच लगभग 45 मिनट बातचीत हुई। इस मुलाकात पर दोनों नेताओं ने चुप्पी साध रखी है।
अमर सिंह ने कहा कि मुलायम और बेनी दोनों उनके अच्छे मित्रों में रहे हैं। इसलिए वह इस मुलाकात या सपा प्रमुख पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
मगर मुलाकात के बड़े राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि सपा के खिलाफ मुहिम में अमर सिंह बेनी की जुबानी तौर पर मदद कर सकते हैं।
एक पक्ष का कहना है कि चूंकि सपा प्रमुख और अमर सिंह में छत्तीस का आंकड़ा है, इसलिए बेनी सपा प्रमुख को चिढ़ाने के लिए ही अमर सिंह से मिले।
जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि बेनी बसपा में अपनी संभावना तलाश रहे हैं। इसलिए वह अमर सिंह से मिले थे क्योंकि अमर सिंह की भी बसपा में जाने की संभावना तलाशने के कयास लगाए जा रहे हैं।
आडवाणी ने मुलायम सिंह के साथ बढ़ती नजदीकियों का फिर संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मुलायम से उनकी बात तो हुई थी लेकिन उन्होंने उसे सार्वजनिक कर दिया।