इलाहाबाद की जिला कचहरी में वकील की हत्या के आरोप में पकड़े गए दरोगा शैलेंद्र सिंह ने अपने साथी दरोगाओं और अफसरों के सामने चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने साथियों से कहा कि वह 11 मार्च को अदालत में वकीलों से घिर चुका था और सभी उसे बुरी तरह पीटने लगे थे। उसने बचने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सका। उसने रिवाल्वर निकाल ली, इसके बावजूद उसके साथ मारपीट की जाती रही। अगर वह गोली न चलाता तो वकील ही उसे मार डालते।
दरोगा दो दिन से शहर और आसपास के इलाके में ही था। वह कभी बस में सवार हो जाता तो कभी ट्रेन में। उसने रात स्टेशनों पर ही गुजारी। पुलिस का कहना है कि वह अंबेडकर नगर अपने घर भागने की फिराक में था और ट्रेन पकड़ने के लिए प्रयाग पहुंचा था। इसी बीच खबर लग गई और स्टेशन पर ही उसे घेर लिया गया। दरोगा को एसपी सिटी राजेश यादव के नेतृत्व में गठित कर्नलगंज, खुल्दाबाद और क्राइम ब्रांच की टीम ने पकड़ा। दरोगा खाली हाथ था। उसने दो दिन अपनी पत्नी से भी बात नहीं की। घर वालों और दोस्तों से भी उसका संपर्क नहीं हो सका था। उसे गिरफ्तार करने वाली टीम में इंस्पेक्टर खुल्दाबाद आरके सिंह, एसओ कर्नलगंज विजय प्रताप सिंह, कांस्टेबल जयशंकर राय आदि मौजूद थे।
रिवाल्वर की होगी बैलेस्टिक जांच
दरोगा की रिवाल्वर की बैलेस्टिक जांच करवाई जाएगी। इसके लिए रिवाल्वर को फारेंसिक लैब भेजा जाएगा। वकील के शरीर से मिली गोली को भी लैब भेजा जाएगा।
हत्यारोपी दरोगा गिरफ्तार, सीबीआई करेगी जांच
वकील की हत्या का आरोपी दरोगा शैलेंद्र सिंह शुक्रवार को पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी प्रयाग स्टेशन से शाम 4.30 बजे दिखाई है। हालांकि चर्चा रही कि पुलिस उसे प्रतापगढ़ के कुंडा कस्बे से पकड़कर लाई है। शाम को 5.30 बजे पुलिस ने गुपचुप तरीके से दरोगा का बेली अस्पताल में मेडिकल करवाया और सीधे नैनी जेल भेज दिया। जेल में ही उसे स्पेशल सीजेएम सुभाष चंद्रा के सामने पेश किया गया। उन्होंने दरोगा को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। दरोगा की गिरफ्तारी, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ.डीवाई चंद्रचूड़ से प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा और डीजीपी एके जैन की मुलाकात के ढाई घंटे भीतर ही हो गई। भेंट के बाद डीजीपी ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। इस बारे में पत्र केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेजा जा रहा है।
उधर, वकील की हत्या को लेकर शहर में तीसरे दिन शुक्रवार को भी बवाल होता रहा। कचहरी से जुलूस लेकर निकले वकीलों और पुलिस में एसएसपी दफ्तर के पास टकराव हो गया। पत्थरबाजी में एक इंस्पेक्टर तथा तीन सिपाही जख्मी हो गए। बता दें, वकील नबी अहमद की 11 मार्च को जिला अदालत में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दरोगा से वकील की कीडगंज थाने में दर्ज एक पुराने मामले को लेकर अदालत में भिड़ंत हुई थी। धक्कामुक्की, मारपीट के बाद दरोगा ने सरकारी रिवाल्वर से वकील को गोली मार दी थी। वकील को अस्पताल भेजा गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद गुस्साए वकीलों ने एसएसपी दफ्तर में तोड़फोड़ की थी जिसके बाद जमकर बवाल हुआ था।
संघर्ष में पुलिस वालों के साथ ही कई वकील भी जख्मी हुए थे। घटना के दिन ही फरार दरोगा ने शंकरगढ़ थाने में सरकारी रिवाल्वर जमा करा दी थी। पीएचक्यू में शुक्रवार को मीडिया से मुखातिब डीजीपी ने कहा कि पुलिस की जांच को लेकर उंगलियां उठेंगी, इसलिए सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है। इससे निष्पक्ष जांच होगी और सच सभी के सामने आ जाएगा।
दरोगा की पत्नी ने दर्ज कराई एफआईआर
वकील नबी अहमद की हत्या के मामले में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। आरोपी दरोगा शैलेंद्र सिंह की पत्नी सपना सिंह ने भी वकील नबी अहमद और चंदन मिश्रा समेत कई अन्य वकीलों के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट, गालीगलौज, जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया है। मुकदमा सपना सिंह का पत्र मिलने के बाद शुक्रवार को दर्ज किया गया। एफआईआर तो दर्ज कर ली गई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि इसमें से नबी अहमद का नाम निकाल दिया जाएगा। नबी अहमद की अदालत में दरोगा से झड़प के बाद गोली चलने से मौत हो गई थी।
सपना सिंह ने मौजूदा घटनाक्रम के आधार पर उसी दिन पत्र डाक के माध्यम से कर्नलगंज थाने को भेज दिया था। सपना का आरोप है कि उनके पति सरकारी कार्य से अदालत गए थे। जहां नबी अहमद और चंदन मिश्रा ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी थी। एफआईआर शुक्रवार को देर रात दर्ज की गई।
दो सौ वकीलों पर तीन मुकदमे
वकीलों पर मुकदमों की संख्या और बढ़ती जा रही है। 11 मार्च को तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में दो सौ वकीलों पर तीन और एफआईआर दर्ज करवा दी गई हैं। 11 मार्च को एसएसपी आफिस में तोड़फोड़ के मामले में 40 अज्ञात वकीलों के खिलाफ एसएसपी के वाचक महेश पांडेय ने कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। बवाल के दौरान सीओ चतुर्थ की बोलेरो को एसएसपी आफिस में तोड़ने पर 125 अज्ञात वकीलों के खिलाफ सीओ के ड्राइवर सुरेश सिंह यादव ने कर्नलगंज में एफआईआर दर्ज कराई है। सिविल लाइंस में बृहस्पतिवार दिन में सिटी बस को तोड़ने और ड्राइवर अशोक कुमार का मोबाइल छीनने के मामले में भी 35 अज्ञात वकीलों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। बवाल के मामले में वकीलों पर तीन दिन के दौरान 19 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
कचहरी में फिर बवाल, पथराव में इंस्पेक्टर जख्मी
कचहरी में वकील की हत्या के खिलाफ चल रहा वकीलों का आंदोलन शुक्रवार को फिर हिंसक हो गया। नारे लगाते हुए वकील एसएसपी दफ्तर की ओर बढ़े तो वहां इकट्ठा पुलिस वालों ने लाठी पटककर वकीलों को खदेड़ दिया। इस बीच पथराव भी किया गया। पत्थरबाजी में इंस्पेक्टर उमाशंकर शुक्ल समेत तीन सिपाही जख्मी हो गए तो पुलिस वालों ने लाठी पटककर उन्हें तितर-बितर किया। वकील कचहरी की ओर भागे लेकिन उनका आक्रोश बरकरार रहा। कचहरी में तकरीबन दो बजे तक तनाव की स्थिति रही।
एसएसपी आफिस के पास फिर से संघर्ष की नौबत शुक्रवार को दिन में 11 बजे शुरू हुई। कचहरी से जुलूस लेकर निकले वकील एसएसपी आफिस के पास तिराहे पर पहुंचकर सभा करने लगे। उनके आक्रामक तेवर को देखकर पीएसी के साथ ही दफ्तर की सुरक्षा में लगे सभी पुलिस तिराहे के करीब पहुंच गए। पुलिस के आगे बढ़ने के साथ ही पत्थरबाजी शुरू हो गई। एसपी सिटी राजेश यादव के साथ ही इंस्पेक्टर उमाशंकर शुक्ला सबसे आगे खड़े थे। एक पत्थर इंस्पेक्टर की हथेली पर लगा। खून निकलने पर पुलिस हरकत में आ गई। उसने लाठियां फटकार कर वकीलों को खदेड़ा।
इस बीच आरएएफ भी आ गई। इंस्पेक्टर के साथ ही कई सिपाही भी मामूली रूप से चोटहिल हो गए। कई वकीलों को भी चोटें आईं। थोड़ी देर बाद पुलिस पीछे हटी तो वकीलों का हुजूम फिर कचहरी तिराहे पर पहुंचा लेकिन नारेबाजी कर लौट आया।
साथी की मदद को आगे आए सूबे के दरोगा
इलाहाबाद में वकील की हत्या में फंसे दरोगा की मदद के लिए सूबे के दरोगा एकजुट हो गए हैं। व्हाट्सएप पर बने एसआई ग्रुप के जरिए दरोगा साथी और परिवार की आर्थिक सहायता के लिए सहयोग जुटा रहे हैं। सहयोग राशि के लिए दरोगा की पत्नी के नाम के बैंक एकाउंट का खाता नंबर भी व्हाट्सएप पर जारी किया गया है।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि इस मुहिम में देवरिया समेत प्रदेश के कई जिलों में तैनात थानेदारों ने दस हजार रुपये और जल्द ही चार्ज से हटे दरोगा पांच हजार रुपये योगदान चंदा दे रहे हैं। बाकी दरोगा और कुछ सिपाहियों को स्वैच्छिक आर्थिक योगदान की छूट है। चर्चा है कि 2008 बैच या उसके बाद के दरोगा इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी कर रहे हैं।
पुलिस वालों के बीच खामोशी से जारी इस मुहिम के बारे में खुलकर बोलने से हर कोई बच रहा है। नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर जहां कुछ ने सहयोग की बात स्वीकार की, वहीं तर्क दिया कि इस मदद का मतलब किसी आरोपी को बचाना नहीं बल्कि उस परिवार को आर्थिक मदद देना है, जो अचानक मुसीबत में घिर गया। व्हाट्सएप पर चल रही इस कोशिश के बीच कुछ संदेश सिस्टम पर सवाल भी उठा रहे हैं। इनमें पुलिस वालों पर बढ़ते दबाव का हवाला है तो वकीलों के निरंकुश तेवर तक पहुंचने से सामाजिक और न्याय व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप भी।
इस संबंध में पूछे जाने पर एसपी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि इस तरह के चंदे या मदद के लिए न तो कोई निर्देश है और न ही किसी को कहा गया है। अगर कोई अपने स्तर पर ऐसा कर रहा है तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
व्हाट्सएप पर जारी संदेशों का मजमून
-‘खबर यह नहीं कि दरोगा को वकीलों के एक झुंड ने जान से मारने का प्रयास किया। खबर यह है कि दरोगा ने एक वकील को गोली मार दी। क्या दरोगा पागल था या उसने किस परिस्थिति में गोली चलाई?, ये किसी ने जानने का प्रयास नहीं किया। वकील को 10 लाख, बुरी तरह घायल पुलिस कर्मियों को क्या?...?’
- दरोगा शैलेंद्र सिंह की पत्नी के नाम से इलाहाबाद की बैंक शाखा का एकाउंट नंबर (जिसे प्रकाशित नहीं किया जा रहा) देकर सवालिया अंदाज में आह्वान, ‘क्या हमें मदद नहीं करनी चाहिए?’
-‘बिलकुल करनी है, सबको भाई’
- ‘सीपी अजय कुमार नागर इलाहाबाद में गोली से घायल सिपाही, जिसकी सुध लेने वाला शासन प्रशासन विभाग कोई नहीं है, जो जिंदगी मौत के बीच झूल रहा है। आओ उसकी मदद करें, उसका अकाउंट नंबर......., अपनी क्षमता के अनुसार मदद करें’
- ‘दोस्तों शायद आप सभी को कानपुर में अपने एक बैचमेट एसआई को यंग एडवोकेट द्वारा गोली से मार देने की घटना याद होगी, उस वक्त कानून और व्यस्था का संकट क्यों नहीं उत्पन्न हुआ?, सरकार या हमारे विभाग ने उस घटना को सीरियसली क्यों नहीं लिया?, क्या सिर्फ पुलिस ही कानून और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है, अपमान सहकर?’