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इम्तियाज ने क्यों नहीं दिया भाई को सहारा?

Sat, 05 Jul 2014 07:22 AM IST
अमर उजाला दिल्ली/टीम डिजिटल
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बड़ा भाई निर्देशक के साथ निर्माता भी हो और छोटे भाई को जिंदगी चलाने के लिए कार बेचनी पड़े। अजीब किस्सा है इन निर्देशक भाईयों का।
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इस शुक्रवार रिलीज हुई फिल्म 'लेकर हम दीवाना दिल' को निर्देशित करने वाले आरिफ अली चर्चित फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली के सगे भाई हैं।

आरिफ को खुद को फिल्म इंडस्ट्री में टिकाए रखने के लिए अपनी कार तक बेचनी पड़ी। सवाल यह उठता है कि क्या इम्तियाज आरिफ की इतनी आर्थिक मदद नहीं कर सकते थे।

आरिफ भी लंबे समय से मुंबई में रह रहे हैं। वह यूटीवी के क्रिएटिव सेक्शन में नौकरी करते रहे हैं। एक निर्देशक के रूप में यह उनकी पहली फिल्म है।

कहां से आया इस फिल्म का विचार

आरिफ कहते हैं कि मैं और क्वीन फिल्म बनाने वाले विकास बहल दोनों ही यूटीवी के क्रिएटिव सेक्शन में काम करता था। विकास ने मुझसे इस फिल्म को लिखने के लिए कहा। तब मैंने यह फिल्म विकास के लिए लिखी। बाद में विकास ने यूटीवी छोड़ दिया। फिर मैंने इसी कहानी को और डेवलप करके लेकर हम दीवाना दिल की पटकथा बनाई।
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बने रहने के लिए बेचनी पड़ी कार

यह फिल्म बनाने से ठीक पहले का किस्सा है। फिल्म बनाने के लिए चूंकि मुंबई में रहना जरूरी था। यूटीवी की नौकरी जा चुकी थी। घर और कार की बैंक किश्त देना भी कठिन हो रहा था। ऐसे समय में आरिफ के पास कार बेचने के अलावा और कोई रास्ता नहीं जान पड़ा। जिंदगी चलाने के लिए आरिफ को उन दिनों अपने कई खर्चे कम करने पड़े।
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इस समय थी भाई की जरूरत

यह वह दौर था जब इम्तियाज फिल्म इंडस्ट्री में चर्चित और सफल निर्देशक बन चुके थे। वह न सिर्फ बड़े बजट की फिल्में निर्देशित कर रहे थे बल्कि हाइवे जैसी फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रहे थे। सवाल यह भी है कि क्या एक ही शहर में रहने के बावजूद आरिफ और इम्तियाज में आपस में बात होती ही नहीं थी। एक समय आरिफ को सबसे ज्यादा सहयोग की जरूरत थी।
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