आंध्र प्रदेश के चित्तूर में हुए एनकाउंटर ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। एनकाउंटर चाहे जहां हुए हों, हमेशा सवालों के घेरे में ही रहे हैं। आपको बताते हैं उन 6 चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के बारे में जिन्होंने एक के बाद एक ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए। हालांकि उन पर आरोप भी लगे लेकिन इनमें से कई सबूतों के अभाव में बच गए।
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1- विजय सालसकर
मुंबई पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर रहे विजय सालसकर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर ज्यादा चर्चित थे। उन्होंने करीब 80 अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराया, इनमें से ज्यादातर अरुण गलवी गैंग से सदस्य थे।
2008 में मुंबई में आतंकी हमले के दौरान सालसकर की मौत हो गई। आतंकी अजमल आमिर कसाब को इस हत्या का आरोपी बनाया गया था। वह एंटी एक्सटॉर्सन सेल के प्रमुख भी थे। उनकी देशभक्ति और बहादुरी के लिए सरकार ने 2009 में उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया।
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मराठी परिवार में पैदा हुए सालसकर ने मुंबई यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी और 1983 में मुंबई पुलिस में सब इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन की। उन्होंने नौकरी ज्वाइन करने के पहले ही साल में राजा शहाबुद्दीन नाम के बदमाश का एनकाउंटर किया था, वह कई मामलों में बांछित था।
24 साल के करियर में सालसकर ने कई शातिर अपराधियों का एनकाउंटर किया। उन्होंने अरुण गवली का एनकाउंटर करने की योजना बनाई थी, हालांकि वह मौके से फरार हो गया। इस दौरान सालसकर ने उसके दो खास गुर्गों को मार डाला था।
2- दया नायक
1995 में मुंबई पुलिस ज्वाइन करने वाले सब इंस्पेक्टर दया नायक ने 80 गैंगस्टर्स का एनकाउंटर किया है। 90 के दशक के आखिरी दौर में नायक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर उभरे। वह महाराष्ट्र के नागपुर में तैनात हैं।
अंडरवर्ल्ड और अपराधियों से मिलीभगत के आरोप में 2006 में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया और गिरफ्तार भी किया गया। हालांकि एंटी क्राइम ब्यूरो को उनके खिलाफ लगे आरोपों पर कोई सबूत नहीं मिले जिसके बाद उन्हें 2012 में दोबारा बहाल कर दिया गया। जनवरी 2014 में उनका ट्रांसफर नागपुर कर दिया गया।
कर्नाटक के एक गांव में पैदा हुए दया नायक ने का शुरुआती जीवन गरीबी में बीता। 1979 में वह पैसे कमाने के लिए घर से मुंबई पहुंचे और एक होटल की कैंटीन में वेटर का काम करने लगे। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और अलग-अलग तरह की नौकरियां भी कीं। पुलिस में नौकरी मिलने से पहले तक वह होटल में ही रहते थे।
1995 में मुंबई पुलिस से जुड़ने के बाद उन्होंने पहला एनकाउंटर 31 दिसंबर को किया। इसमें छोटा राजन गैंग के दो बदमाश मारे गए। 1997 में उन पर अपराधियों ने हमला बोला जिसके चलते वह अस्पताल में भर्ती हो गए। 2004 तक उन्होंने कुल 300 लोगों को गिरफ्तार किया था और 30 गैंगस्टर्स का एनकाउंटर किया।
3- प्रदीप शर्मा
करीब 312 अपराधियों के एनकाउंटर में शामिल रहे प्रदीप शर्मा फिलहाल मुंबई पुलिस के अधिकारी हैं। मुंबई एनकाउंटर स्क्वाड से जुड़े शर्मा को 31 अगस्त 2008 में सस्पेंड कर दिया गया। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे हालांकि 9 मई 2009 को उन्हें दोबारा बहाल कर दिया गया क्योंकि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।
मूल रूप से यूपी के आगरा के रहने वाले शर्मा के पिता अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। वह महाराष्ट्र में ही पले बढ़े। 1983 में उन्होंने सब इंस्पेक्टर के तौर पर मुंबई पुलिस ज्वाइन की और माहिम पुलिस स्टेशन में पोस्टेड होने के कुछ दिन बाद जुहू स्पेशल ब्रांच में ट्रांसफर कर दिए गए। लगातार अच्छे प्रदर्शन से वह प्रमोशन हासिल करते गए और क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के सीनियर इंस्पेक्टर बन गए।
शर्मा ने 25 साल के करियर में जिन 312 अपराधियों के एनकाउंटर किए उनमें कुछ आतंकी भी शामिल थे। उन पर एक मराठी फिल्म भी बनी है। 2008 में पुलिस को शिकायत मिली थी शर्मा और दाऊद इब्राहिम की मिलीभगत चल रही है। हालांकि बाद में उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले और कहा गया कि छोटा राजन गैंग उन्हें फंसा रहा था।
4- प्रफुल भोसले
मुंबई पुलिस का चर्चित चेहरा रहे प्रफुल भोसले की तहकीकात और अपराधियों से लोहा लेने के जोश ने कइयों को प्रभावित किया है। कहा जाता है कि भोसले किसी हॉलीवुड फिल्म के पुलिस किरदार की तरह फुर्तीले हैं।
1987 से लेकर अब तक भोसले ने लगभग 85 एनकाउंटर किए हैं। इनमें छोटा राजन गैंग और छोटा शकील गैंग के कई अहम गुर्गे भी शामिल हैं। 1983 में मुंबई पुलिस ज्वाइन करने से पहले वह सिटी बैंक में क्लर्क की नौकरी करते थे।
काफी दिनों तक मुंबई पुलिस में रहने के बाद उन्हें स्पेशल ऑपरेशन स्क्वाड के लिए चुना गया। उन्हें वीरता सम्मान से नवाजा गया।
5- रवींद्र आंग्रे
मुंबई पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रवींद्र आंग्रे विवादों से घिरे रहे और अपने रिटायरमेंट के दो महीने पहले ही नौकरी से निकाल दिए गए।
30 वर्ष के करियर में उन्होंने 52 अपराधियों का एनकाउंटर किया, इनमें ठाणे का माना हुआ गुंडा सुरेश मानचेकर भी शामिल है। 2008 में उन्हें एक बिल्डर को धमकी देने का आरोपी पाया गया और मई 2014 में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
नौकरी से निकाले जाने के बाद उन्होंने कहा कि वह कोर्ट में जाएंगे, उन्हें साजिश के तहत निकाला गया है। 2008-09 में उन्होंने 14 महीने जेल में बिताए और 2009 में जमानत पर रिहा होने के कुछ दिन बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिए गए।
1983 बैच के पुलिस अधिकारी आंग्रे ने खुद ही नक्सल प्रभावित इलाकों में पोस्टिंग चुनी थी। बीते साल लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
1972 में जन्मे सचिन हिंदुराव वाजे मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी हैं। मुंबई एनकाउंटर स्क्वाड के सदस्य रहे वाजे ने 63 अनकाउंटर किए हैं। 1990 में महाराष्ट्र पुलिस ज्वाइन करने वाले वाजे ने नवंबर 2007 में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने छोटा राजन और दाऊद गैंग के कई शातिर अपराधियों को मार गिराया।
मूल रूप से कोल्हापुर के रहने वाले वाजे की पहली पोस्टिंग गढ़चिरौली इलाके में हुई, जोकि नक्सल प्रभावित था। 1992 में उन्हें ठाणें ट्रांसफर कर दिया गया और वह जल्द ही बड़े मामले सुलझाने में माहिर हो गए।
कुछ ही दिनों में वह ठाणे क्राइम ब्रांच स्पेशल स्क्वाड के हेड बन गए। 17 साल के करियर में उन्होंने शातिर अपराधियों का खात्मा किया। इनमें मुन्ना नेपाली का नाम भी शामिल है। वाजे, प्रदीप शर्मा को अपना प्रेरक मानते हैं। वह साइबर एक्सपर्ट थे। 1997 में वह तब चर्चा में आए जब उन्होंने इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड फ्रॉड का खुलासा किया था।