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कब-कब भीड़ ने की रेप के आरोपियों की हत्या

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नगालैंड के दीमापुर में रेप के आरोपी युवक को जेल से निकाल कर सरेआम घसीटने और फिर उसकी निर्मम हत्या करने की घटना ने देश भर सनसनी फैला दी है। 5 मार्च को हजारों लोगों की भीड़ ने दीमापुर सेंट्रल जेल में बंद सैयद शरीफ़ ख़ान नाम के कैदी को जेल से बाहर निकालकर मार डाला था।
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इसके बाद से शहर में तनाव फैल गया और लोगों ने जमकर बवाल भी किया। सड़कों पर पुलिस की चौकसी बढ़ी और रविवार को कर्फ्यू भी लगा दिया गया, लेकिन आपको बता दें कि यह देश में ऐसा पहला मामला नहीं है, जब रेप के आरोपी के साथ ऐसा सलूक किया गया है। इसके पहले भी रेप के आरोपियों को लोगों ने अपने तरीके से सजा दी और सारे नियम कानून नजरअंदाज किए।

पढ़िए, तीन मामले, जब महिलाओं और आम लोगों ने रेप के आरोपियों की जान ले ली।

केस 1- इसकी गंदी नजर से बच नहीं पाई कोई महिला!

नागपुर में आतंक का पर्याय बन चुके अक्कू यादव से हर महिला खौफ खाती थी। जिस इलाके में वह रहता था वहां के करीब 300 परिवारों में से शायद ही कोई ऐसा हो जो अक्कू की गंदी नजर से बचा हो।

अक्कू सीरियल किलर नहीं एक स्थानीय गुंडा और सीरियल रेपिस्ट था। उसकी गैंग के लोग भी ऐसी ही शर्मनाक हरकतें करते थे और 10-11 साल की मासूम बच्चियों को अगवा करके गैंगरेप करते थे।

अक्कू यादव ने कॉल सेंटर में काम करने वाली एक युवती से रेप किया। युवती ने पुलिस से उसकी शिकायत की लेकिन पुलिस ने युवती को ही डांटकर भगा दिया। आरोप है कि अक्कू ने स्‍थानीय पुलिस और अधिकारियों को पैसे व शराब के बल पर खरीद लिया था।

भरी अदालत में काटा था रेपिस्ट का प्राइवेट पार्ट

रेप पीड़िता को जब इंसाफ की उम्मीद नहीं दिखी तो वह खुद ही आगे आकर आरोपी से बदला लेने उतर पड़ी। आरोपी अक्कू ने एक दिन सरेंडर किया और 13 अगस्त 2004 को मामले की सुनवाई के लिए अक्कू को कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया।

उसने भीड़ में बलात्कार-पीड़ित युवती को देखा और उसे एक वेश्या कहा, जिसके बाद वहां मौजूद महिलाओं का गुस्सा भड़क उठा। हाथ में चाकू और मिर्ची पाउडर लिए करीब 200 महिलाओं ने धावा बोला और पुलिस की कस्टडी में मौजूद अप्पू को बाहर खींच कर उस पर हमला कर दिया।

देखते ही देखते अप्पू पर करीब 50 बार चाकू से ‌हमला हुआ। यही नहीं, एक महिला ने चाकू से उसका गुप्तांग भी काट दिया। घटना के कुछ ही देर में अप्पू ने अदालत परिसर में ही दम तोड़ दिया।

इसमें महिलाओं को तुरंत गिरफ्तार किया गया था पर उन्हें शहर में प्रदर्शनों के बाद छोड़ा गया क्योंकि झुग्गी-झोपड़ी की हर महिला ने गौरवमय तरीक़े से इस हत्या की ज़िम्मेदारी ली थी।

केस 2- बिहार: संदिग्ध रेपिस्ट की पीट-पीटकर हत्या

बिहार के समस्तीपुर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में 7 अक्तूबर 2013 को रेप की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला था। इस संबंध में पुलिस से शिकायत की गई थी।

मुफस्सिल थाने के तत्कालीन प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने घटना के अगले दिन बताया था कि जोगियामठ आधारपुर गांव में 50 साल के केशव साह ने कथित रूप से एक घर में घुस कर एक महिला के साथ रेप की कोशिश की। महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोग जमा हो गए और उसकी जमकर पिटाई की।

ज्यादा पिटाई होने की वजह से आरोपी की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। मृतक के परिजनों ने दो लोगों को नामजद करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
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केस 3- बेटी से रेप करने वाले को मार डाला, बनाया वीडियो

एक शख्स ने 11 साल की बच्ची से रेप करने वाले आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला। उसने उसका वीडियो भी बनाया। बताया जा रहा है कि 23 वर्षीय युवक कई महीनों से बच्ची का यौन उत्पीड़न कर रहा था।

मामला ब्राजील का है। युवक ने वाट्सऐप से बच्ची को तस्वीरें भेजी थीं और बच्ची को एक शहर में मिलने बुलाया था। हालांकि उसे जरा भी इल्म नहीं हुआ कि लड़की की जगह उसका पिता वहां पहुंचने वाला है।

तय जगह पर पहुंचे लड़की के पिता ने आरोपी को पीटना शुरू कर दिया और इस दौरान उसका वीडियो भी बनाया। उसने पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी। उसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया में डाल दिया और लिखा कि जो भी ऐसा करेगा, वो भरेगा।

वीडियो में दिखा कि युवक पिटाई के दौरान लगातार रहम की भीख मांग रहा था, लेकिन आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। उसका शव घटना के तीन दिन बाद बरामद हुआ था।
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