काशी का आईना कहे जाने वाले गंगा घाटों की सूरत पीएम नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के 11 महीने बाद भी नहीं बदल सकी है। वर्षों बाद पीएम की ही पहल पर कुछ संस्थाएं जागीं तो सिर्फ अस्सी की सीढ़ियों से गाद हट सकी।
चालू माह के अंत तक मोदी फिर काशी आने वाले हैं। ऐसे में अस्सी-रविदास घाट के बीच की भी सिल्ट हटाई जाने लगी है लेकिन खींचतान के चलते काम जोर नहीं पकड़ पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि घाटों की बेहतरी के नाम पर कागज पर सौंदर्यीकरण की योजना बनाने के अलावा अब तक कुछ नहीं हो सका है।
कई घाट ऐसे हैं जिनकी सफाई की जिम्मेदारी उठाने के बाद संस्थाओं ने वहां मुड़कर देखा तक नहीं।
गंगा घाटों पर गंदगी का राज
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होने के बावजूद गंगा घाटों पर अभी कुछ खास काम नहीं हो सका है। पीएम ने आठ नवंबर, 2014 की सुबह अस्सी घाट पर फावड़ा चलाकर जब स्वच्छता अभियान का श्रीगणेश किया था तब उनके पीछे खड़े होने वाले कुछ लोगों को छोड़ दिया जाए तो बाकी चेहरे अब भी सामने नहीं आ सके हैं।
अस्सी घाट के उत्तरी तरफ के रीवा, गंगा महल घाट की सफाई का जिम्मा पंजाब नेशनल बैंक ने लिया था। दबाव के बाद दो दिन फावड़े से सिल्ट की खोदाई कराकर खानापूर्ति कर ली गई। चेतसिंह किला घाट को प्रसाधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने से वहां से पर्यटक नाक दबाकर पैदल गुजर रहे हैं।
महानिर्वाणी घाट, लाली घाट, जलासेन घाट, भोसले घाट, रामघाट से लेकर राजघाट के बीच साफ-सफाई की हालत बहुत खस्ता है।
सहायक अभियंता सीएंडडीएस एके सिंह का कहना है कि16 घाटों की मरम्मत, सौंदर्यीकरण और सिल्ट सफाई की योजना केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से तैयार की गई है। डिजाइन भी तैयार हो गई है। करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से पांडेय घाट से जलासेन घाट के बीच की सीढ़ियों, मढ़ियों का कायाकल्प कराया जाएगा। जल्द ही काम नजर आने लगेगा।
पशुओं की आरामगाह बने हैं घाट
गंगा घाट छुट्टा पशुओं के लिए आरामगाह बन गए हैं। सामने घाट, शिवाला, चौकी घाट, नारद घाट, ललिता घाट, राजघाट के अलावा राजेंद्र प्रसाद घाट, अस्सी घाट पर इनका जमावड़ा कभी भी देखा जा सकता है। गंगा में पशुओं को न नहलाने के निर्देश की भी धज्जियां उड़ रही हैं।
अलबत्ता, पर्यटक इन पशुओं की वीडियो क्लिप बनाने के साथ ही तसवीरें भी खींचने के लिए उत्सुक रहते हैं। इससे काशी की छवि पर क्या असर पड़ता होगा, समझा जा सकता है।
श्मशान घाटों की पंप से धुलाई
हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाटों की धुलाई पंप लगाकर कराई जा रही है। दोनों घाटों पर राख, लकड़ी और कफन के ढेर पड़े हुए थे। अब कुछ युवा इन घाटों की सूरत बदलने के लिए पसीना बहा रहे हैं। अगर इसी तरह काम होता रहा तो पखवारे भर में दोनों घाट साफ-सुथरे नजर आने लगेंगे।
रेलिंग तक हुई नदारद, गिरने का खतरा
तुलसी घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, ललिता घाट पर लगी रेलिंग टूटने से वहां श्रद्धालुओं के गिरकर घायल होने का खतरा पैदा हो गया है। रेलिंग टूटने की शिकायत भी स्थानीय बाशिंदों ने नगर निगम प्रशासन से की है लेकिन अभी तक उसे दुरुस्त कराने का काम नहीं किया जा सका है।
अस्सी-रविदास घाट के बीच रुकी सिल्ट सफाई
अस्सी-रविदास घाट के बीच डेढ़ सौ मीटर लंबे घाट की सिल्ट हटवा रहे गायत्री परिवार के पदाधिकारी परेशान हैं। रात को सिल्ट लदे ट्रैक्टर-ट्राली को नगवा की ओर से गुजरने से रोक दिया गया है। इससे बुधवार को ही सिल्ट खोदाई का काम रोक दिया गया।
गायत्री परिवार के कोआर्डिनेटर राजकुमार पांडेय ने बताया कि डीएम प्रांजल यादव, नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी को घटना की जानकारी दी गई है लेकिन प्रशासनिक सहयोग नहीं मिल सका। पीएम के संसदीय कार्यालय को भी घाट की सफाई में आ रहे अवरोध की सूचना दी गई है।