दुनिया को लोकतंत्र की नई परिभाषा देने वाले अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहिम लिंकन की हत्या से जुड़े कई अहम पहलू अभी तक दुनिया के सामने नहीं आए हैं।
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आपको बता दें कि 14 अप्रैल 1865 में लिंकन को वाशिंगटन के ‘फोर्ड थियटर’ में उस वक्त गोली मारी गई थी जब वो जब वो ऑवर अमेरिकन कजिन नाटक देख रहे थे।
लिंकन को गोली किसी और ने नहीं बल्कि एक जाने माने रंगमंच कर्मी जॉन वाइक्स बूथ ने मारी थी। दिलचस्प बात यह थी कि लिंकन को जिस वक्त गोली मारी गई थी उस वक्त उनके निजी सुरक्षागार्ड जॉन पार्कर उनके साथ मौजूद नहीं थे।
लिंकन पूरी दुनिया में अपने काम के लिए मशहूर थे। उन्होंने अमेरिका में स्लेवरी या गुलामी प्रथा को पूरी तरह से खत्म कर एक बड़ा काम किया था। जानिए लिंकन की मौत से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें।
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लिंकन जानते थे कि उनकी हत्या होने वाली है
जानकारी के मुताबिक लिंकन ने अपनी हत्या से कुछ रोज पहले अपने "सपने" का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, " मैने एक सपना देखा है जिसमें मैं व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम की तरफ जा रहा हूं और वहां पर काफी सारे सैनिक और मातम मनाने वाले मौजूद हैं।"
उन्होंने कहा कि जब मैने एक सैनिक से पूछा कि कौन मर गया है तो उस पर एक सैनिक ने जवाब दिया, "राष्ट्रपति। उनकी हत्या की गई है।"
यह स्टोरी उस वक्त चर्चा में आई जब अब्राहिम लिंकन के पूर्व कानूनी सलाहकार और मित्र वार्ड हिल लैमन ने लिंकन की हत्या के 20 साल बाद इस तथ्य को प्रकाशित करवाया था। वहीं कुछ इतिहासकारों ने भी इस तथ्य पर अपनी सहमति दर्ज कराई है।
लिंकन ने जब दिया अपना आखिरी भाषण
11 अप्रैल 1865 को लिंकन ने एक शानदार भाषण दिया था। शायद यह उनका आखिरी भाषण था। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि अब वक्त आ गया है जब अफ्रीकी-अमेरिकन को भी मत का अधिकार दे दिया जाए।
"प्रेसिडेंट लिंकन एसेसिनेशन" किताब लिखने वाले लेखक हेराल्ड होत्जर ने बताया कि लिंकन के भाषण के इन शब्दों का सीधा मतलब यह था कि वो नीग्रो लोगों को बराबरी का दर्जा देना चाहते थे।
अपनी हत्या के दो साल पहले भी फोर्ड थियेटर गए थे लिंकन
अपनी हत्या से ठीक दो साल पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहिम लिंकन फोर्ड थियेटर में एक प्ले देखने गए थे। इस नाटक में जॉन वाइक्स बूथ ने खलनायक की भूमिका अदा की थी। लिंकन ने यहां पर "द मार्बल हर्ट" प्ले देखा।
होत्जर के मुताबिक लिंकन ने न सिर्फ साल 1863 में बूथ के इस नाटक को देखा था बल्कि उन्होंने उस फोर्ड थियेटर को भी अच्छे से निहारा था जहां दो साल बाद उनकी हत्या होने वाली थी।
लेखक ने बताया कि प्ले के दौरान बूथ ने प्रेसिडेट बॉक्स में अपनी खलनायकी के काफी हिस्से सामने रखे। बूथ की अदाकारी को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि वो लिंकन को निशाना बनाकर ही वो लाइने दोहरा रहे थे।
हालांकि लिंकन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "वो मेरी तरफ काफी तीखे व्यवहार का प्रदर्शन कर रहा था। क्या वो ऐसा नहीं कर रहा था?"
लोगों को लगा ही नहीं कि राष्ट्रपति मर गए हैं
फोर्ड थियेटर में जिस वक्त लिंकन को गोली मारी गई, उस वक्त में तो किसी को अहसास ही नहीं हुआ कि राष्ट्रपति की हत्या कर दी गई है। एसोसिएट प्रेस एपी के मुताबिक लिंकन को 14 अप्रैल 1865 को गोली मारी गई।
लिंकन बार बार इस लाइन पर ठहाके लगा रहे थे, "एक अच्छे समाज के व्यवहार को नहीं समझ पाया, खैर मेरा मानना है कि मैं काफी कुछ जानता हूं जिससे कि मैं काफी कुछ बदल सकता हूं।"
जिस वक्त लिंकन को गोली मारी गई उस वक्त थियेटर में काफी सारे लोग मौजूद थे और नाटक का लुत्फ ले रहे थे। इस नाटक के तीसरे हिस्से में एक लंबा पॉज होता है और उसके बाद एक अभिनेता अपने हाथ में पिस्टल लेकर दाखिल होता है। यह सीन लोगों का ध्यान खींचता है। लेकिन प्रेसिडेंट बॉक्स में आने से पहले तक लोगों को सब कुछ सामान्य सा ही लग रहा था।
जानकारी के मुताबिक बूथ ने लिंकन के बगल में बैठे मेजरी हैनरी रैथबोन पर भी हमला किया था और वो इसके बाद वहां से भाग गए थे।
इतिहासकार टेरी एल्फोर्ड ने अपनी किताब फार्च्यून फूल: द लाइफ ऑफ जॉन वाइक्स बूथ जो कि हाल ही में रिलीज हुई है, एक कोट लिखा है जिसमें कहा गया है कि अधिकांश लोगों का मानना है कि बूथ पागल व्यक्ति नहीं था। वास्तव में एल्फोर्ड ने बताया कि बूथ को लिंकन की हत्या के लिए राजनीतिक रूप से उकसाया गया था।
जॉन वाइक्स बूथ उन चुनिंदा लोगों में शामिल था जिनका यह मानना था सिविल वार के पहले अमेरिका इतिहास से सर्वश्रेष्ठ देशों में शुमार था। एल्फोर्ड ने कहा कि लिंकन ने राष्ट्रपति बनने के बाद मूलभूत रास्तों के जरिए काफी कुछ बदल दिया।
आपको बता दें कि बूथ एक अच्छे खासे परिवार से ताल्लुक रखता था और वह खुद एक उम्दा अभिनेता था। लिंकन की मौत के 12 दिन बाद उसे पकड़ लिया गया था।