हिमालय साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण मंच की ओर से वरिष्ठ कवि और आलोचक श्रीनिवास श्रीकांत को साहित्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए आजीवन उपलब्धि सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
मंच के अध्यक्ष एसआर हरनोट ने बताया कि श्रीनिवास श्रीकांत समकालीन हिंदी कविता और आलोचना के एक जाने पहचाने कवि हैं।
1970 में उन्होंने ‘काल‘ नाम से एक साहित्यिक पत्रिका भी निकाली थी। इसका हिंदी साहित्य क्षेत्र में व्यापक स्वागत हुआ। उनका पहला कविता संग्रह ‘नियति, इतिहास और जरायु‘ वर्ष 1986 में प्रकाशित हुआ।
उसके बाद वे भारतीय और विदेशी साहित्य के अतिरिक्त भारतीय संगीत और रंगमंच के अध्ययन में ऐसे रमे कि 22 सालों तक वे लेखन से बाहर रहे।
वर्ष 2008 में अपने दूसरे कविता संग्रह ‘बात करती है हवा‘ से उनके रचनात्मक लेखन की जो शुरूआत हुई, वह अब तक जारी है।
अब तक घर एक यात्रा है, हर तरफ समंदर है, चट्टान पर लड़की, आदमी की दुनिया का दिन, कथा में पहाड़, गल्प के रंग, कथा त्रिकोण आलोचना पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कई अभी लिखी जा रही हैं।
शीघ्र ही सम्मान समारोह कर उनकी दो पुस्तकें आदमी की दुनिया का दिन और एक आलोचना पुस्तक ‘कथा त्रिकोण‘ भी लोकार्पित की जाएंगी।