उज्जैन के मांझी समाज ने मांगों के लिए बीते वर्षों में कई प्रदर्शन किए हैं।
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को कांग्रेस पार्टी घोषणावीर नाम से संबोधित करती है। क्योंकि वह घोषणा तो कर देते हैं लेकिन इन्हें पूरा करने की और उनका ध्यान कभी नहीं होता है। उज्जैन में विधानसभा चुनाव में वर्ष 2013 में निकली जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी कि शासकीय तालाबों पर माझी समाज का पहला हक होगा और जाति प्रमाण पत्र बनाने में समाज के लोगों को जो भी विसंगतियां आ रही हैं, उसे तुरंत हटाते हुए समाज के लोगों के जाति प्रमाण पत्र जल्द से जल्द बनाए जाएंगे।
यह बात मांझी आदिवासी पंचायती समाज के प्रदेश अध्यक्ष राकेश वर्मा ने अमर उजाला से कही। उन्होंने कहा कि सीएम ने यह भी कहा था कि इस समाज के उत्थान के लिए मैं अनेक काम करूंगा। वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री टावर चौक पर मुंडन करवाकर विरोध प्रदर्शन कर रहे समाज के लोगों से यह बात कह गए, लेकिन उन्होंने इन घोषणाओं को 10 साल पूरे होने के बावजूद भी अपने वादों को अब तक पूरा नहीं किया।
वर्मा ने आगे बताया कि वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री ने जो वादे मांझी समाज से किए थे। उन्हें आज तक पूरा नहीं किया। समाज के लोगों ने 2015 में उज्जैन से भोपाल तक अर्धमुंडन करवाकर पदयात्रा निकाली। 2018 में भोपाल पहुंचकर समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया और मछली की माला पहनकर भी विरोध जताया लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणाएं पूरी नहीं की।
जहां गई जन आशीर्वाद यात्रा वहां किया विरोध
प्रदेश अध्यक्ष राकेश वर्मा ने बताया कि समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र ना बनने के कारण सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर मैं मध्यप्रदेश में जहां भी मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा पहुंची थी वहां गया और इस यात्रा का जमकर विरोध किया था। मुख्यमंत्री के उज्जैन आगमन पर भी समय-समय पर इन मांगों को पूरा करने के लिए ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई निराकरण नहीं निकला। वर्मा ने आरोप लगाया कि माझी समाज के भोई, कहार, ढीमर, केवट को शायद मुख्यमंत्री अपना वोट बैंक ही नहीं समझते हैं। इसीलिए उनको इस समाज की कोई समस्या नजर नहीं आती।