इसलिए वहां पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम लागू नहीं होगा, क्योंकि देश की आजादी के दिन से लेकर वर्ष 1993 तक हिंदू पक्ष के लोग नियमित दर्शन-पूजन करते थे। 12 सितंबर 2019 को वाराणसी की सिविल कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि मां शृंगार गौरी से संबंधित मुकदमा पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम और वक्फ अधिनियम से बाधित नहीं है। सिविल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मसाजिद कमेटी की अपील खारिज कर दी। अब वाराणसी की जिला अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ज्ञानवापी का मसला पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम से बाधित नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद हमारा पक्ष बहुत ज्यादा मजबूत हुआ है। अब ज्ञानवापी परिसर की वैज्ञानिक जांच सहित हमारी अन्य जो वैधानिक मांगें हैं, उनके लिए एक मजबूत आधार मिलेगा।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता मुमताज अहमद ने कहा कि हम हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश का अध्ययन करेंगे। यह जानकारी मिली है कि पुनरीक्षण याचिका खारिज हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश आ अध्ययन करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा कि क्या करना है। आदेश का अध्ययन किए बगैर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा।
मुफ्ती शमीम अहमद अल हुसैनी कासिमी ने कहा कि न्यायालय का सम्मान भारत के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं है। हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की है तो इसके पीछे सबूत और बुनियाद होगा। फैसले को पूरा पढ़ने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी।