कार्यक्रम का शुभारंभ करते सीजेआई और सीएम योगी।
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान उन्होंने न्यायिक क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट की पहल का उल्लेख भी किया। बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 1950 से 2024 तक के तकरीबन 36 हजार निर्णय का हिंदी अनुवाद कराया है। इसका मकसद यह कि जो अंग्रेजी नहीं जानते, उनके घर, हृदय और द्वार तक कानून पहुंचे। इसे हर प्रदेश में लागू किया जा सकता है।
उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ीं पुरानी यादें भी ताजा कीं। बताया कि जब वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में थे, तब भी अधिकतर अधिवक्ता माई लॉर्ड... कहने के बाद हिंदी में बहस शुरू कर देते थे। तब वह भी अपनी बंबइया हिंदी में उसका अनुवाद करने लगते थे।
राष्ट्रीय विधि विवि उद्घाटन समारोह में मुख्य न्यायमूर्ति डॉ.डी.वाई चंद्रचूड़ व सीएम योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
सीजेआई ने कहा कि जब हम शिक्षा में बराबरी की बात करेंगे, तभी समाज में बराबरी की बात लागू होगी। इससे लोग अपने अधिकार की बात कर सकेंगे। कथाकार मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि हमारी शिक्षा व्यवस्था सामाजिक चेतना नहीं जगाती। यह विशेष वर्ग का हित साधती है। विश्वभर में डर, ईर्ष्या को बढ़ावा देती है, जबकि, हमारी शिक्षा का उद्देश्य सबकी भलाई होना चाहिए।
सीजेआई ने देश के प्रथम राष्ट्रपति के योगदान को याद किया। कहा, डॉ.राजेंद्र प्रसाद अच्छे अधिवक्ता भी थे। प्रयागराज से ही उन्होंने वकालत की पढ़ाई की थी। भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में सबसे पहला उनका ही नाम इसलिए आया क्योंकि वह बहुत काबिल थे। उनके नाम पर इस विश्वविद्यालय का नामकरण किया जाना गौरव की बात है। इससे इस विवि ने उनके नाम ही नहीं बल्कि उनकी विरासत का भी सम्मान किया है।
इस मौके पर उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालाय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी समेत कई न्यायमूर्ति और अधिवक्तागण उपस्थित थे। इस दौरान सीजेआई ने विधि विश्वविद्यालय की स्मारिका का विमोचन भी किया।
राष्ट्रीय विधि विवि उद्घाटन समारोह में मुख्य न्यायमूर्ति डॉ.डी.वाई चंद्रचूड़ व सीएम योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
धर्म, ज्ञान और न्याय की त्रिवेणी है प्रयागराज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुशासन की पहली शर्त रूल ऑफ लॉ है। बिना बार और बेंच के यह संभव नहीं है। प्रयागराज केवल गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम ही नहीं, धर्म, ज्ञान और न्याय की त्रिवेणी भी है। योगी ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं के लिया राज्य सरकार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी।