अजमेर के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खां।
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उर्स के मौके पर अजमेर के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खांने देश के नाम अमन और शांति का संदेश जारी किया है। उन्होंने बताया, पैगंबर मोहम्मद साहब ने कहा, क्या आप जानते हैं कि दान, उपवास और प्रार्थना से बेहतर क्या है? यह कि लोगों के बीच शांति और अच्छे संबंध बनाकर रखे जाएं, क्योंकि संघर्ष और बुरी भावनाएं मानव जाति को नष्ट कर देती हैं।
इस्लाम हिंसा की निंदा करता है। अहिंसा, सहिष्णुता, सद्भाव और एक दूसरे के लिए सम्मान को बढ़ावा देता है। इस्लाम विशेष रूप से कहता है कि अल्लाह हमलावरों से नफरत करता है, इसलिए ऐसा मत बनो। इस्लाम अपने अनुयायियों से क्षमा का उपयोग करने और सहिष्णुता को बढ़ावा देने का आह्वान करता है।
उन्होंने कहा, कुरान के अनुसार शांति शांतिपूर्ण साधनों से ही प्राप्त की जा सकती है। इस्लाम में किसी भी कारण से धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक या निर्दोष लोगों की हत्या गलत है। आपको किसी की हत्या नहीं करनी चाहिए, अल्लाह ने यह पवित्र जीवन दिया है। इस्लाम किसी भी निर्दोष व्यक्तियों को मारे जाने और सताए जाने से सख्त मना करता है।
कई आतंकी संगठनों और कई अतिवादी संगठनों ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस्लाम के नाम का इस्तेमाल किया है। किसी को भी आतंकवाद के कृत्यों के लिए दोषी ठहराया जा सकता है, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो। ऐसे संगठन इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं। पूरी दुनिया में निर्दोष लोगों पर ऐसे संगठनों के हमलों का कोई धार्मिक औचित्य नहीं है।
यह सब इस्लाम में सख्त वर्जित है। कुछ आतंकवादी संगठन हैं निर्दोष लोगों की हत्या कर खुद को शहीद के रूप में देखते हैं। जो लोग इस्लाम के नाम पर शहादत के लिए बेगुनाहों की हत्या करते हैं, उन्हें अपने कार्यों पर पुनर्विचार करना चाहिए। क्योंकि, इस्लाम में उनके कार्यों की कड़ी निंदा की गई है। इस्लाम के अनुसार आतंकवादी सही मायने में मुसलमान नहीं हैं।