प्रोविंशियल सिविल सर्विसेज (पीसीएस) परीक्षा कराने में सुस्त उत्तराखंड लोक सेवा आयोग एग्जाम का पैटर्न बदलने में चुस्त हो गया। आयोग ने परीक्षा के दोनों चरणों (प्री और मेन्स) के पैटर्न में एकसाथ बदलाव कर हजारों युवाओं को परेशानी में डाल दिया है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने इसी साल प्री और मेंस दोनों परीक्षाओं का पैटर्न बदल दिया है। इस वजह से कई वर्षों से पीसीएस परीक्षा देते आ रहे युवाओं के लिए तो चुनौती पैदा हो ही गई, नए युवाओं के लिए भी विषयों का विकल्प खत्म हो जाने की वजह से परेशानी हो गई है।
जबकि संघ लोक सेवा आयोग सहित बाकी राज्यों में पहले प्री और बाद में मेंस परीक्षा का पैटर्न बदला गया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने वर्ष 2011 में सिविल सर्विस एग्जाम प्री का पैटर्न चेंज किया था।
यूपी में नहीं बदला मेंस का पैटर्न
इसके एक साल बाद मुख्य परीक्षा का पैटर्न चेंज कर दिया। यूपीएससी ने सभी राज्यों के आयोगों को सुझाव दिया था कि वे अभ्यर्थियों की सहूलियत देखते हुए परीक्षा के दोनों चरणों के पैटर्न में एक साल के अंतर पर बदलाव करें।
उत्तर प्रदेश ने इसी क्रम में वर्ष 2012 में प्री का पैटर्न चेंज कर दिया था, लेकिन मेन्स का पैटर्न अभी नहीं बदला गया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी दोनों चरणों में एक-दो साल के अंतर पर बदलाव किया गया।
इसके उलट उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने एक ही साल में दोनों परीक्षाओं का पैटर्न बदल दिया है। उत्तराखंड आयोग ने मुख्य परीक्षा में विषयों का विकल्प भी समाप्त कर दिया है। इसकी वजह से वह छात्र परेशान हैं जो कि कई बार तैयारी करने के बावजूद मुख्य परीक्षा से बाहर हो गए थे।
14 साल में हुई केवल चार बार परीक्षा
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की सुस्ती का आलम यह है कि राज्य गठन के बाद 14 साल में अब तक सिर्फ चार बार पीसीएस एग्जाम कराया जा सका है। जबकि इस अवधि में उत्तर प्रदेश में 13 परीक्षाएं हो चुकी हैं।
चुने जाएंगे 15 गुना अभ्यर्थी
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की नई व्यवस्था के मुताबिक पीसीएस परीक्षा में अब कुल पदों के 15 गुना अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चुने जाएंगे।
मसलन यदि दस पद हैं तो 150 अभ्यर्थियों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए होगा। इसी तरह पीसीएस-जे परीक्षा में पदों के सापेक्ष दस गुना अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा तक पहुंचेंगे। आयोग के सचिव एसएन पांडे ने यह जानकारी दी।
पैटर्न में अगर क्रमिक बदलाव किया जाता तो निश्चित तौर पर पुराने अभ्यर्थियों को कम परेशानी होती। एक साथ दोनों परीक्षाओं का पैटर्न बदल दिए जाने से युवाओं पर डबल बोझ पड़ गया है।
- सुशील कुमार, निदेशक, प्रयास आईएएस एकेडमी
मैं एक बार मुख्य परीक्षा तक जा चुका हूं। दो वैकल्पिक विषयों के साथ परीक्षा दी थी लेकिन इस बार मुख्य परीक्षा में विकल्प ही खत्म हो गए। प्री के साथ ही मुख्य परीक्षा की तैयारी भी नए सिरे से करनी पड़ेगी।
-अखिलेश, अभ्यर्थी